मुरादाबाद। जिले के 19 विद्यालय ऐसे पाए गए हैं जो पुस्तक विक्रेताओं से साठगांठ कर शासनादेश के विरुद्ध अधिक लाभ के लिए निर्धारित पुस्तकों से इतर कई अन्य पुस्तकें भी बच्चों पर थोपने का खेल करते हैं। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह द्वारा कराई गई जांच में इसका खुलासा हुआ है। इसमें प्रथम दृष्ट्या डीआईओएस की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। इस पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिले में काफी समय से शासनादेश के विरुद्ध निर्धारित पाठ्य पुस्तकों के स्थान पर अन्य पुस्तकें अथवा उसके अतिरिक्त पुस्तकें विद्यार्थियों पर थोपने का खेल चल रहा है। शहर निवासी मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के अध्यक्ष अनुज गुप्ता ने इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की थी। उन्होंने इस संबंध में शहर के 19 विद्यालयों के नाम की सूची भी शिकायत के साथ संलग्न की थी। मंडलायुक्त ने इसका संज्ञान लेते हुए अपने स्तर से कुछ अधिकारियों के माध्यम से जब इसकी जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई।
मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि जांच में शिकायती पत्र में जिन 19 विद्यालयों का जिक्र किया गया है, वे सभी दोषी मिले हैं। जांच में जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. अरुण कुमार दुबे भी प्रथम दृष्ट्या पर्यवेक्षणीय कार्य में न सिर्फ शिथिलता बरतने बल्कि मिली भगत में संलिप्त होने के दोषी भी पाए गए हैं। लिहाजा उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जो विद्यालय इसमें दोषी मिले हैं उनके संचालकों और पुस्तक विक्रेताओं की सूची तैयार की जा रही है। डीएम को भी संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई के साथ जिले के अन्य विद्यालयों की भी पड़ताल करवाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि जो भी विद्यालय संलिप्त मिलेंगे उनपर नियमानुसार जुर्माना और उनकी एनओसी निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।