दो वर्ष पहले तक मुरादाबाद जनपद में डीएलएड पाठ्यक्रम 36 कॉलेजों में संचालित था। इसमें से विद्यार्थियों के घटते रुझान की वजह से पांच कॉलेजों ने मान्यता वापस करने के लिए एडी बेसिक के यहां आवेदन किया था। शेष 32 कॉलेजों में से सात कॉलेजों में एक भी विद्यार्थी ने दाखिला नहीं लिया था। डायट के दो सौ दाखिलों को मिलाकर शेष 25 कॉलेजों में सिर्फ 1296 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था।
अधिकारियों का कहना था कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2018 में बीएड डिग्री धारकों को भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती में मान्य कर दिया था, क्योंकि डीएलएड करने के बाद अभ्यर्थी सिर्फ कक्षा एक से आठ तक की शिक्षक भर्ती में ही आवेदन कर सकते थे और बीएड करने के बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में भी शिक्षक बनने के अर्ह हो जाते थे। इसलिए अभ्यर्थी बीएड को ही प्राथमिकता दे रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में बीएड डिग्री धारकों को प्राथमिक शिक्षक बनने की योग्यता से बाहर कर दिया था। प्राथमिक विद्यालयों में नौकरी के लिए डीएलएड अभ्यर्थी ही अर्ह हैं।
बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में दिखी उदासी
इस वर्ष बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा सिर्फ आठ कॉलेजों में ही हुई थी। यहां पर दो पालियों में 4072 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इनमें से सिर्फ 3416 अभ्यर्थियों ने ही परीक्षा दी थी, जबकि पिछले साल बीएड प्रवेश परीक्षा देने वालों की संख्या 6438 थी।
- डीएलएड कॉलेजों में सभी सीटें भर गई हैं। मुरादाबाद में 27 कॉलेजों में नए सत्र में तीन हजार अभ्यर्थियों ने डीएलएड पाठ्यक्रम में दाखिला लिया है। गत वर्ष इन कॉलेजों में अध्ययनरत अभ्यर्थियों की संख्या करीब एक हजार के आसपास थी।
बुद्धप्रिय सिंह, प्रभारी प्राचार्य, डायट