विशनपुर भीमाठेर गांव निवासी निजार खां ने बताया कि पूर्व में दो सिपाहियों ने उनके शस्त्र लाइसेंस के आवेदन पर सही रिपोर्ट लगाने के बजाय उसे खारिज कर दिया था। इसकी शिकायत पर अगवानपुर चौकी के दरोगा महेश पाल सिंह को मामले की जांच सौंपी गई थी। निजार खां का आरोप है कि इसके बाद शस्त्र लाइसेंस पर रिपोर्ट के लिए वह दरोगा से मिले तो उसने तीन माह उनसे चौकी के चक्कर लगवाए। बाद में रिपोर्ट के एवज में 20 हजार रुपये मांगे।
इस पर 19 फरवरी को निजार ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन के सीओ मोहम्मद फाजिल सिद्दीकी से की। इसके बाद सीओ ने एंटी करप्शन टीम लगा कर योजनाबद्ध तरीके से बुधवार को सिविल लाइंस थाने से दरोगा को रंगे हाथों गिरफ्तार करवा लिया। सिविल थाना प्रभारी आरपी शर्मा ने बताया कि दरोगा पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तार दरोगा को बरेली स्थित कोर्ट में पेश किया जाएगा।
छह माह पहले बना था दरोगा, छह साल की बची है नौकरी
रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार महेश पाल छह माह पहले ही सिपाही से दरोगा बना था। सिपाही के पद पर भी अगवानपुर चौकी क्षेत्र में तैनाती रही थी। दरोगा मूलरूप से बरेली के सिरौली थाना क्षेत्र के पलथा गांव का रहने वाला है। वह 1989 में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। वह जिले की कई पुलिस चौकी और थानों के साथ पीआरवी में भी रहा। 34 साल तक सिपाही की नौकरी करने के बाद 16 अक्तूबर 2023 को उसकी दरोगा पद पर प्रोन्नति हुई थी। विभागीय लोगों का कहना है कि उसकी छह साल की नौकरी बची है।