मुरादाबाद। राज्य कर विभाग की ओर से जीएसटी के वर्ष 2020-2021 का पुराना नोटिस फिर से जारी होने से कर व्यापारी नाराज हैं। कर अधिवक्ताओं का आरोप है कि इन नोटिसों के माध्यम से व्यापारियों का शोषण किया जा रहा है।
जीएसटी एवं आयकर अधिवक्ता गौरव गुप्ता का कहना है कि यह नोटिस व्यापारियों के मेल आईडी और फोन पर भेजे जा रहे हैं। नोटिस में कई ऐसे बिंदुओं को उठाया गया है जो नोटिस की परिधि में नहीं आते हैं। नोटिस में व्यापारियों से लेनदार तथा देनदार का विवरण मांगा जा रहा है। साथ ही बैंकों के विवरण मांगे गए हैं। 50 हजार से कम बिक्री पर ई वे बिल बनाने की आवश्यकता नहीं है। नोटिस में पूछा जा रहा है कि आपने ई वे बिल क्यों नहीं बनाया है। इसके अलावा व्यापारियों की बिक्री, टैक्स तथा आईटीसी में अंतर नोटिसों में दिखाया जा रहा है। जबकि कई केसों में बिक्री और आईटीसी में कोई अंतर नहीं पाया गया है। यदि व्यापारी नोटिस का जवाब नहीं देंगे तो उन पर आगे और नोटिस जारी किया जाएगा। जवाब न देने पर व्यापारी पर भारी टैक्स लगा दिया जाएगा। व्यापारियों को विधिक परिधि में आने वाले बिंदुओं पर ही नोटिस जारी किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त व्यापारियों पर डेढ़ साल के अंदर वर्ष 2017-2018 से वर्ष 2020-2021 तक चार सालों की कार्यवाही एक साथ कर दी गई है। व्यापारी एक साल के नोटिस से जैसे ही निपटता है, दूसरे साल का नोटिस फिर आ जाता है। जिससे व्यापारी जीएसटी की कार्यवाही में ही उलझ कर रह गए हैं। इस मामले में जीएसटी अधिवक्ता दीपक कुमार गुप्ता सहित अन्य अधिवक्ताओं ने नाराजगी जताई है।