मुरादाबाद। मेडिकल कॉलेजों में दाखिला के लिए राष्ट्रीय स्तर पर हुए नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट में कई विद्यार्थियों को बदले पैटर्न की वजह से सवालों को हल करने में मुश्किल हुई। विद्यार्थियों का कहना है कि बॉटनी में इस बार न्यूमेरिकल के बजाय थ्योरी के सवाल ज्यादा पूछे गए थे। फिजिक्स का पेपर औसत था। हालांकि रसायन विज्ञान ने उन्हें कुछ राहत दी।
रविवार को दोपहर दो बजे से शाम 5:20 बजे तक परीक्षा का आयोजन किया गया। इस बार विद्यार्थियों को हल करने के लिए 20 मिनट अतिरिक्त दिए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि करीब तीन वर्ष पहले तक थ्योरी के सवाल ज्यादा पूछे जाते थे। फिजिक्स का पहला पार्ट आसान था, जबकि दूसरा पार्ट औसत था। व्हीट स्टोन ब्रिज और पृष्ठ तनाव टॉपिक के सवाल घुमावदार थे। हालांकि सेक्शन बी में पांच सवाल छोड़ने का भी विकल्प दिया गया था। नीट ने कैलकुलेशन के सवाल देकर परीक्षार्थियों को फंसाने की कोशिश की थी। दो-तीन सवालों को छोड़ दें तो ज्यादातर सवाल फार्मूला आधार पर आए थे। बॉटनी के प्रश्न ट्रिक वाले आए थे। इसलिए इस प्रश्नपत्र को परीक्षार्थियों के लिहाज से कठिन कहा जा सकता है। सवाल बहुत घुमावदार थे। इसमें सही-गलत के सवाल ज्यादा थे। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार उलझाने वाला प्रश्नपत्र आया था। जूलोजी में स्टेटमेंट वाले सवाल ज्यादा थे। इस बार स्टेटमेंट के नौ सवाल थे, जबकि पिछली बार इन सवालों की संख्या चार थी। इन सवालों को हल करने में परीक्षार्थियों को समय लगता है। इस बार एक सवाल एनाटॉमी ऑफ फ्लावरिंग प्लांट्स बोनस था। उसके सभी विकल्प गलत थे। सही विकल्प नहीं होने की वजह से परीक्षार्थियों को इस सवाल के पूरे अंक मिल सकते हैं। केमिस्ट्री में ज्यादातर सवाल एनसीईआरटी से पूछे गए थे। मैकेनिज्म से जुड़े सवाल भी आसान थे। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड के समय सीधे-सीधे सवाल पूछे गए थे, जिसका विद्यार्थियों आसानी से जवाब दे दिया था, लेकिन इस बार पैटर्न बदल दिया गया है।
14 केंद्रों पर हुई परीक्षा
सीएल गुप्ता वर्ल्ड स्कूल, केजीके कॉलेज, सेंट मैरी स्कूल बुद्धि विहार, आरएसडी अकादमी, एसएस चिल्ड्रेन अकादमी गर्ल्स स्कूल, विल्सोनिया कॉलेज, विल्सोनिया स्कॉलर्स होम, दिल्ली पब्लिक ग्लोबल स्कूल, आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल, स्प्रिंगफील्ड्स कॉलेज दिल्ली रोड, स्प्रिंगफील्ड्स कॉलेज नया मुरादाबाद, केसीएम स्कूल, पीएमएस स्कूल, गोल्डन गेट ग्लोबल स्कूल।