मुरादाबाद। मंडल के प्रत्येक जिले की सक्षम समितियां केन हार्वेस्टर खरीदेंगी। जिन समितियों के पास धन नहीं होगा तो उनको सरकार से अनुदान भी मिलेगा। हार्वेस्टर से गन्ना और अन्य फसलों की कटाई आसान होगी। मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस व्यवस्था से किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। गन्ने की खेती के दाैरान मजदूरों की भारी किल्लत से किसान परेशान हैं। कटाई संयंत्रों की अनुपलब्धता और लगातार बढ़ती कृषि लागत के कारण कृषकों में गन्ने की खेती के प्रति रुझान कम हो रहा है। उप गन्ना आयुक्त हरवीर सिंह ने बताया कि गन्ना उत्पादक जिलों की सक्षम सहकारी गन्ना विकास समितियां या गन्ना विकास परिषदों द्वारा ही सेल्फ प्रोपेल्ड केन हार्वेस्टर क्रय किया जाएगा। यदि समितियों की आर्थिक स्थिति कमजोर है तो उसे सरकार द्वारा अनुदान दिया जाएगा। मंडल के पांचों जनपदों रामपुर, बिजनौर, संभल, अमरोहा एवं मुरादाबाद में एक-एक केन हार्वेस्टर क्रय किए जाएंगे। हार्वेस्टरों द्वारा पेराई सत्र के दौरान कम से कम 450 एकड गन्ने की कटाई की जाएगी। इस हालात में किसानों को प्रति हेक्टेयर 20 से 25 क्विंटल अधिक गन्ना उत्पादन प्राप्त होगा। मिलों को अधिक चीनी परता (रिकवरी) प्राप्त होती है। इसका सीधा आर्थिक लाभ किसानों को मिलता है। इसके अलावा, खेत की हरी पत्तियों और अपशिष्ट पदार्थों का मौके पर ही मिश्रण हो जाता है। मृदा की उर्वरा शक्ति मजबूत होती है। हार्वेस्टर बेहद कम समय में एक वृहद क्षेत्र की कटाई और छिलाई का कार्य करने में पूरी तरह सक्षम हैं। बड़े केन हार्वेस्टर अधिक महंगे हैं, इसलिए आम किसान की मांग के अनुरूप लघु एवं सीमांत कृषकों के छोटे खेतों के लिए कई कंपनियां मिनी केन हार्वेस्टर के विकास और निर्माण पर गंभीरता से विचार कर रही हैं।