एसएसपी आवास की जमीन के फर्जीवाड़े की जांच कर रही एसआईटी ने जिला पुलिस से किराये के बारे में रिकार्ड मांगा था लेकिन पुलिस कार्यालय से रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। इस मामले में नगर निगम से भी रिकार्ड मांगा गया है। तहसील के सौ साल पुराने कागजातों को खंगाला जा रहा है।
मंडलायुक्त के निर्देश पर डीएम ने एसएसपी आवास के जमीन की जांच करने लिए एसआईटी गठित की है। इस टीम में अपर आयुक्त सर्वेश गुप्ता के निर्देशन में एडीएम प्रशासन, एसडीएम सदर और नगर निगम के सहायक आयुक्त शामिल हैं। टीम ने पुलिस से रिकार्ड मांगा है कि एसएसपी आवास के लिए कब से कब तक किराया दिया गया। तीन दिन बाद एसआईटी को कागजात उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी प्रकार नगर निगम से सौ साल पहले के रिकार्ड को मांगा गया है। एसडीएम सदर एसएसपी आवास की जमीन के सौ साल पहले के रिकार्ड को खंगाल रहे हैं। इधर इस मामले में एसएसपी ने सिविल लाइंस थाने में पांच माह पहले दो भाइयों सुनील और सुधीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस का कहना है कि एसएसपी आवास की जमीन का खुद को मालिक बताकर एक व्यक्ति 16 साल तक किराया वसूलता रहा। किराया बढ़ाने का मामला कोर्ट में पहुंचा तो तत्कालीन एसएसपी हेमराज मीणा ने जमीन के रिकाॅर्ड की छानबीन कराई। खुद को जमीन का मालिक बताने का रिकाॅर्ड जब रेवेन्यू में नहीं मिला तो एसएसपी ने किराया देना बंद कर दिया। इस मुकदमे की विवेचना पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह कर रहे हैं।
2003 से एसएसपी आवास पर जताया मालिकाना हक
एसएसपी बंगले पर 1927 से 2003 तक किसी ने अपना मालिकाना हक नहीं जताया था। 2003-04 में एक अधिवक्ता ने इस बंगले को अपना बताते हुए कोर्ट में दावा ठोंक दिया। इसके बाद एसएसपी पांच हजार रुपये प्रतिमाह किराया का भुगतान करते रहे। 2019 में जब किराया बढ़ाने का मामला कोर्ट में पहुंचा गया तो एसएसपी ने किराया देना बंद कर दिया। इसके बाद पुलिस ने जांच की तो फर्जीवाड़ा सामने आया। मंडलायुक्त आंजनेय सिंह ने एक सप्ताह में जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं लेकिन रिकार्ड खंगालने में टीम को देर हो सकती है।