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Moradabad News: श्रीराम ने किया रावण का संहार, भस्म हुआ अहंकार

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मुरादाबाद। सायक एक नाभि सर सोषा, अपर लगे भुज सिर करि रोषा। लै सिर बाहु चले नाराचा, सिर भुज हीन रुंड महि नाचा ।। अर्थात एक बाण ने नाभि के अमृत कुंड को सोख लिया। अन्य बाण उसके सिर और भुजाओं को ले उड़े। सिर और भुजाओं से रहित रुंड (धड़) पृथ्वी पर गिरकर नाचने लगा।
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विजयदशमी के पावन पर्व पर रामलीला के मंचों पर लंकापति रावण का अंत हुआ। भगवान श्रीराम के धनुष से निकला अग्निबाण जैसे ही दशानन की नाभि पर लगा, वह जमीन पर गिर गया और एक बार फिर असत्य पर सत्य की जीत हुई। रामलीला मैदान लाइनपार, लाजपत नगर में महाराजा हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज के मैदान और दीनदयाल नगर में नेहरू युवा केंद्र के मैदान में अहंकारी रावण का पुतला धू-धू कर जल उठा।


लाइनपार

अग्नि बाण लगते ही रावण हुआ धराशायी
मुरादाबाद। लाइनपार के रामलीला मैदान में श्री रामलीला मैनेजिंग कमेटी की ओर से विजयदशमी उत्सव का शुभारंभ पताका समारोह से हुआ। मैदान में भव्य आतिशबाजी की गई और मनमोहक झांकियां निकलीं। मंचन की शुरुआत में भगवान राम की वानर सेना और रावण की सेना के बीच जमकर युद्ध हुआ। फिर राम और रावण के बीच युद्ध प्रारंभ होता है।
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रावण का अंत करने के लिए भगवान राम एक के बाद एक तीर छोड़े। जिसके जवाब में रावण ने भी अपनी शक्तियों का प्रयोग किया। तभी रावण के छोटे भाई विभीषण ने रावण को मिले वरदान के बारे में भगवान श्रीराम को बताया। जिस पर श्रीराम ने रावण की नाभि पर तीर मारा जहां अमृत संचित था। तीर लगते ही रावण जमीन पर गिर गया और ढेर हो गया।
श्रीराम के अग्नि बाण से मैदान में खड़ा रावण का करीब सौ फीट का पुतला जलकर खाक हो गया। इसके बाद राम का विजय तिलक हुआ और आरती उतारी गई। रामलीला मैदान के आसपास लगी दुकानों पर लोगों ने जमकर खरीदारी की। वहीं बच्चों के साथ बड़ों ने झूलों का भी आनंद लिया। इस अवसर पर राजीव प्रकाश बंसल, संदीप बंसल, रोहित बंसल आदि मौजूद रहे।



अस्थियां बीनने के लिए मची होड़
रामलीला मैदान लाइनपार में रावण दहन के बाद दर्शकों द्वारा रावण की अस्थियां बीनने का रिवाज है। किसी भी हादसे से बचने के लिए रावण के पुतले के चारों तरफ लोहे के जाल से बैरिकेडिंग की गई थी। जाल के चारों ओर समिति के पदाधिकारी और पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा। रावण दहन करीब नौ बजे हुआ। पुलिस का प्रबंध अच्छा होने के बावजूद रावण दहन के बाद लोगों को रोकना मुश्किल हो गया। रावण की अस्थियां बीनने की जल्दबाजी में मैदान में भगदड़ जैसा माहौल बन गया।



लाजपत नगर

रावण वध का मंचन देख बजीं तालियां
मुरादाबाद। श्री राम कथा मंचन समिति लाजपत नगर की ओर से श्री रामलीला मैदान में हीरालाल शर्मा के कुशल निर्देशन में श्री बृजधाम रामकृष्ण लीला संस्थान वृंदावन के कलाकारों द्वारा रावण वध का मंचन किया गया। मंचन देखकर दर्शकों ने तालियां बजाईं।
मंचन के दाैरान दिखाया गया कि युद्ध के मैदान में राम और रावण का भयंकर युद्ध होता है। जब श्रीराम के बाणों को रावण पर असर नहीं होता है तब विभीषण ने बताया कि रावण की नाभि में अमृत है। इसके बाद प्रभु श्रीराम रावण की नाभि पर बाण मारकर अमृत सुखा देते हैं और उसका वध कर देते हैं। रावण दहन का कार्यक्रम महाराजा हरिश्चंद्र डिग्री कॉलेज के मैदान पर किया गया। बड़ी संख्या में शहरवासियों ने आतिशबाजी का आनंद लिया। मुख्य अतिथि मेयर विनोद अग्रवाल, जिलाधिकारी अनुज सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सतपाल अंतिल का स्वागत समिति के अध्यक्ष महेश चंद्र अग्रवाल, महामंत्री विनोद सक्सेना ने किया। इस दौरान श्याम कृष्ण रस्तोगी, मुकुल बंसल, शरद अग्रवाल, रामकुमार गुप्ता, विवेक शर्मा आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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दीनदयाल नगर
कुंभकर्ण, मेघनाद व रावण वध का हुआ मंचन
मुरादाबाद। श्री रामलीला समिति सिविल लाइंस की ओर से दीनदयाल नगर में साईं मंदिर रोड स्थित युवा केंद्र में त्रिमूर्ति कला केंद्र के पात्रों द्वारा कुंभकर्ण, मेघनाद और रावण वध का मंचन किया गया।
श्रीराम ने धनुष को खींचकर सौ बाण संधान किए। कुंभकर्ण के मरने का समाचार सुनकर रावण अधीर हो उठा। उसने मेघनाद को पुनः युद्ध क्षेत्र में भेजा जहां उसका सामना फिर से लक्ष्मण से हुआ। पर इस बार लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया। इसके बाद रावण स्वयं युद्ध करने निकल पड़ा। राम और रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ और राम ने रावण का वध कर दिया। रावण का तेज प्रभु के मुख में समा गया। यह देखकर शिवजी और ब्रह्माजी हर्षित हुए। ब्रह्माण्ड भर में श्रीराम जय-जय की ध्वनि गूंजने लगी। इसके बाद रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान संरक्षक शिशिर गुप्ता, डॉ संजीव राजन, जयविंद्र प्रधान, अध्यक्ष सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता, महामंत्री पीयूष गुप्ता आदि मौजूद रहे। ब्यूरो

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पुराना दसवां घाट
मेघनाद वध के बाद सती हुईं सुलोचना
मुरादाबाद। प्राचीन श्री रामलीला कमेटी पुराना दसवां घाट के रामलीला महोत्सव में शनिवार को मेघनाद वध व सुलोचना सती का मंचन किया गया। कलाकारों ने दिखाया कि रामदल के योद्धाओं का नेतृत्व शेषनाग अवतार लक्ष्मण ने किया, जबकि रावण सेना की ओर से मेघनाद ने मोर्चा संभाला।
लक्ष्मण व मेघनाद के बीच भीषण युद्ध आरंभ हुआ। युद्ध के दौरान लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया। मौत की खबर सुनते ही मेघनाद की पत्नी सुलोचना विलाप करने लगीं। कुछ समय के बाद पति मेघनाद के शीश को गोद में रखकर सुलोचना अग्नि में बैठकर सती हो गईं। मेघनाद वध के बाद रावण युद्ध के लिए अहिरावण को भेजता है और युद्ध में वह भी मारा जाता है। इस दौरान अध्यक्ष यथार्थ किशोर, संरक्षक छत्रपाल सिंह, प्रवक्ता धर्मेन्द्र यादव, आदित्यवीर शास्त्री, इंद्रजीत शर्मा आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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