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भोले के भक्तों से भगवामय हुई पीतल नगरी

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मुरादाबाद। सावन के आखिरी सोमवार पर भगवान भोले के जलाभिषेक के लिए गंगाजल लेकर आ रहे कांवड़ बेड़ों से पीतल नगरी भगवामय हो गई। शिवभक्तों में जबरदस्त उत्साह रहा। पूरे माह रहने वाली कांवड़ यात्रा की रौनक रविवार को आस्था के सैलाब में बदल गई। रविवार सुबह सात बजे से शुरू हुआ अनवरत कांवड़ियों का सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
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लगातार 17 घंटे तक श्रद्धालुओं को न पांवों में छालों की फिक्र थी, न ही थकान का असर। घुंघरुओं की छन-छन आवाज, होठों पर भोले के जयकारे और डीजे पर बजते भजनों पर थिरकते कदम और केसरिया सैलाब कुछ ऐसा ही नजारा था रविवार को दिल्ली रोड और कांठ रोड का। कोरोना संक्रमण काल में दो वर्ष बाद यह पहला मौका है, जब श्रद्धालुओं में कांवड़ को लेकर इतना ज्यादा उत्साह नजर आया। सभी श्रद्धालु देर शाम तक शिवालयों में पहुंच गए और रात दो बजे से जलाभिषेक शुरू हो गया।
हरिद्वार और ब्रजघाट से गंगाजल लाने वाले कावड़ियों का रविवार को कारवां था। दिल्ली रोड पर श्रद्धालुओं की भीड़ की वजह से निकला दूभर हो गया था, जबकि कांठ रोड पर भी देर शाम तक कांवड़ियों के जत्थे निकलते रहे। शहरवासियों ने कांवड़ियों की सेवा में पलक पावड़े बिछा दिए। भव्य तरह से सजी कांवड़े, झांकियां और म्यूजिक साउंड पर बजते भजनों ने हर किसी को उत्साहित कर दिया। कांवड़ यात्रा में बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं सभी शिव भक्ति में लीन नजर आए। जीरो प्वाइंट पाकबड़ा पर महिलाओं की टोलियां कांवड़ियों के स्वागत के लिए इंतजार कर रही थीं। वहां से वह अपने कंधे पर कांवड़ लेकर शहर में पहुंची। मार्ग में जगह-जगह शिविरों से कांवड़ियों पर फूलों की बारिश की गई। सुबह में हुई बारिश से मौसम सुहावना हो गया था। मुख्य मार्गों पर दूर तक कांवड़ियों के जत्थे ही दिखाई दे रहे थे। शहर के प्रमुख मंदिर झारखंडी महादेव मंदिर में रात दो बजे, किसरौल स्थित 84 घंटा मंदिर में सोमवार तड़के तीन बजे, प्राचीन शिव मंदिर झांझनपुर व अन्य में सुबह चार बजे जलाभिषेक शुरू हुआ।
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देशभक्ति का दिया संदेश
कांवड़ छोटी हो या बड़ी, हर दूसरी कांवड़ पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा नजर आ रहा था। कई कांवड़ तो तिरंगे से ही तैयार की गई थीं। कुछ कांवड़ों पर तिरंगे की लाइटें लगाई गई थीं। हाथों में भी श्रद्धालु तिरंगा लेकर चल रहे थे तो डीजे पर देशभक्ति के गीत भी बज रहे थे। कुल मिलाकर भोले की भक्ति के साथ श्रद्धालुओं ने देशभक्ति का भी संदेश दिया।
मोतियों के शिवलिंग और महिला श्रद्धालुओं ने खींचे रथ
दिल्ली रोड पर मोतियों से बनीं तीन फीट की शिवलिंग ने भी श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं, कई श्रद्धालुओं के जत्थों में एक के बाद एक ठेले बांधकर गुब्बारों और झालरों से सजावट की गई थी। इसमें कटघर बालाजी दरबार होली मिलन मैदान के महिला श्रद्धालुओं के जत्थे ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। पांच रथों की झांकियों में भगवान शिव, गणेश भगवान, बालाजी महाराज, राधा-कृष्ण और हनुमान जी की झांकियां थीं। इस जत्थे में 250 महिलाएं शामिल थीं। किसरौल की एक झांकी में पंचमुखी हनुमान जी शेषनाग के नीचे बैठे दिखाई दे रहे थे।
सिक्के और कलश से भी सजाई गई थीं कांवड़
आदर्श नगर के बेड़े की कांवड़ को सवा लाख सिक्कों से सजाया गया था। यह कांवड़ ब्रजघाट से आई थी। वहीं पीतल नगरी निवासी कपिल सक्सेना ने अपनी कांवड़ को 101 किलो के पांच से सजाया था। भोले की भक्ति के आगे थकान गायब थी।
शिविर में बाबा बर्फानी के किए दर्शन
मिलन विहार कालोनी के गेट पर लगाए शिविर में भोलेनाथ का स्वरूप धरे एक श्रद्धालु बर्फ पर खड़े रहे। राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने भी भजनों पर नृत्य किया। एक शिविर में रुई से शिवलिंग बनाए थे। वहीं, चौधरी चरण सिंह चौक पर श्री महादेव सेवा समिति की ओर से बाबा बर्फानी और अमरनाथ की गुफा बनाई गई थी। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से बाबा बर्फानी के दर्शन किए। भंडारे में कांवड़ियों का स्वागत किया गया और प्रसाद वितरित किया गया। दिल्ली के कलाकारों ने शिवजी के सुंदर भजनों पर झांकियों का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान ऋषिपाल सिंह नागर, रामबाबू गुप्ता, प्रदीप अग्रवाल, विपुल गुप्ता, शरद जैन, विमल पंवार, प्रमोद कुमार, नीरज गुप्ता, आशीष अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, कविता गुप्ता आदि मौजूद रहीं।
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