मुरादाबाद। शिल्प गुरु बाबू राम यादव को केंद्र सरकार से पद्मश्री अवार्ड की सूचना मिली लेकिन तीसरे दिन भी केंद्र सरकार से कोई पत्र नहीं मिला। इधर शिल्प गुरु को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
केंद्र सरकार के होम सेक्रेटरी का 25 जनवरी की दोपहर बाबू राम यादव को कॉल आया कि उनको पद्मश्री अवार्ड के लिए चयनित किया गया है। गणतंत्र दिवस बीतने के बावजूद बाबू राम के पास केंद्र सरकार को अधिकृत पत्र नहीं मिला है। इसकी पुष्टि बाबू राम के साथ रहने वाले पौत्र प्रणव यादव ने की है। परिजनों का कहना है कि दिल्ली बुलाने के लिए मार्च में तिथि घोषित होने की संभावना है।
किशोर उम्र से ही सीखने के लिए गए थे शिल्प गुरु के पास
बच्चों के खेलने कूदने की उम्र में बंगला गांव के रहनेवाले बाबू राम ने कक्षा नौ तक पढ़ाई करने के बाद ब्रास पर नक्काशी का हुनर 1962 में सीखना शुरू किया। उनको शहर के मशहूर शिल्प गुरु अमर सिंह ने नक्काशी के गुर सिखाए। कम समय में बाबूराम ने ब्रास के प्लेट पर एंग्रेविंग करना सीख गए। उम्र 74 साल पूरी होने के बावजूद वह बारीक काम कर रहे हैं।
एक हजार से अधिक लोगों को शिल्प का हुनर सिखाया
शिल्प गुरु बाबू राम के हाथों में कमाल का जादू है। उन्होंने बताया कि अभी तक वह एक हजार से अधिक लोगों को दस्तकारी के हुनर को सिखा चुके हैं। इनमें 200 से अधिक महिलाएं शामिल हैं। कुष्ठ रोगियों और शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को भी प्रशिक्षित कर चुके हैं। सभी लोग अपने स्थान पर अच्छा कार्य कर रहे हैं। 1985 में उनको स्टेट अवार्ड मिला। इसके बाद 1992 में उनको नेशनल अवार्ड मिला। 2014 में उनको तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शिल्प गुरु अवार्ड से सम्मानित किया था।
बहू को भी मिला है स्टेट अवार्ड
बाबू राम के तीनों बेटे अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए ब्रास पर नक्काशी का काम कर रहे हैं। उनकी बहू शीतल यादव पत्नी चंद्र प्रकाश यादव को कुछ दिन पहले स्टेट अवार्ड मिला है।