कुंदरकी। दावत ए इस्लामी इंडिया के कुंदरकी के मोहल्ला कास्थान में संचालित मदरसा फैजाने रजा के प्रिंसिपल कारी अब्दुल वकील अत्तारी ने कहा कि माहे शाबान तो क्या आता है शराफत, बुलंदी, भलाई, उल्फत और नूर का समा बंध जाता है,,। इस माहे मुबारक में नेकियों की कसरत खताओं की मगफिरत और नूजूल ए बरकत का सिलसिला बढ़ जाता है, इस महीने के बारे में नबी ए करीम ने फरमाया कि माहे शाबान की पंद्रहवीं रात साल भर में पैदा होने वाले बच्चों का नाम लिख दिया जाता है और इसी रात मरने वाले का नाम भी लिख दिया जाते हैं। इसी रात मखलूक का रिज्क तकसीम होता है इसी रात उनके अमाल उठाए जाते हैं। इसलिए शब ए बरात बेहद अहम रात है कोई नहीं जानता की उसकी किस्मत में क्या लिख दिया गया है लिहाजा किसी भी सूरत में इस रात को गफलत में नहीं गुजारना चाहिए।