इससे पहले प्रदेश स्तर से सांची संस्था ने अस्पताल की आयुष्मान सेवाएं निलंबित कर दी थीं। सीएमओ स्तर से जांच में पाया गया कि अस्पताल संचालक ने उन मरीजों की रिपोर्ट बनाकर भुगतान के लिए भेजी थी, जिनका वास्तव में ऑपरेशन नहीं हुआ। 36 केस फर्जी दिखाए गए थे। इनमें से अस्पताल को लगभग एक लाख रुपये का भुगतान भी किया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने इस भुगतान से पांच गुना ज्यादा वसूली की है। जांच में पाया गया कि अस्पताल में जिन डॉक्टरों के नाम से जनरल मेडिसिन व सर्जरी का काम चल रहा था, वे कभी अस्पताल नहीं गए। सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह ने बताया कि बरुआ अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है, अब यदि डॉक्टर ने कोई मरीज अस्पताल में भर्ती किया तो सख्त कानूनी कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।