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भगवान श्रीराम की पादुका लेकर लौटे भरत

सार

श्रीरामलीला समिति सिविल लाइंस की ओर से युवा केन्द्र में श्रीरामलीला के भव्य मंचन के चौथे दिवस पर रघुवंश सांस्कृतिक परिवार के पात्रों द्वारा भरत कैकेई संवाद, पंचवटी में सूर्पनखा का आना और खरदूषण वध, मारीच का सोने का मृग बनना, सीता हरण, जटायु उद्धार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इस पर भरत के क्रोध ने सीमा लांघ दी और अपनी मां का त्याग कर दिया। परंतु राम माता कैकेई और पिता दशरथ के आदेश के पालनार्थ लौटने से मना किया और भरत को वापस अयोध्या जाकर अयोध्या का राजपाट संभालने का आदेश दिया।
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मुरादाबाद। श्रीरामलीला समिति सिविल लाइंस की ओर से युवा केन्द्र में श्रीरामलीला के भव्य मंचन के चौथे दिवस पर रघुवंश सांस्कृतिक परिवार के पात्रों द्वारा भरत कैकेई संवाद, पंचवटी में सूर्पनखा का आना और खरदूषण वध, मारीच का सोने का मृग बनना, सीता हरण, जटायु उद्धार का प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
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कलाकारों ने दिखाया कि राम वन गमन के पश्चात भरत-शत्रुघ्न अपने ननिहाल से वापस अयोध्या आते हैं और भगवान राम के 14 वर्ष का वनवास और महाराजा दशरथ के निधन की जानकारी मिलती है। इस पर भरत के क्रोध ने सीमा लांघ दी और अपनी मां का त्याग कर दिया। भरत भइया राम को वापस लाने के लिए जाते हैं। परंतु राम माता कैकेई और पिता दशरथ के आदेश के पालनार्थ लौटने से मना किया और भरत को वापस अयोध्या जाकर अयोध्या का राजपाट संभालने का आदेश दिया। भरत राम की खड़ाऊं लेकर वापस अयोध्या चले गए। इसके बाद खर-दूषन के वध और रावण सीता जी को हरण कर ले जाने और जटायु उद्धार का मंचन हुआ। संरक्षक शिशिर गुप्ता, डॉ संजीव राजन, अध्यक्ष सुरेंद्र प्रकाश गुप्ता, महामंत्री पीयूष गुप्ता, कोषाध्यक्ष निर्वेश भटनागर, सुनील गुप्ता, डॉ. आनंद सिंह आदि मौजूद रहे।
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