पंच बायोप्सी कैंसर की जांच के लिए सरल व अत्याधुनिक तकनीक है। इसमें त्वचा पर घाव से ऊतक का एक छोटा, गोल टुकड़ा निकालने के लिए एक तेज, खोखले व गोलाकार उपकरण का उपयोग किया जाता है। त्वचा के नीचे फैट वाले टिशू की परत को लगभग 4 मिलीमीटर काटने और टिशू का नमूना निकालने के लिए उपकरण को दोनों ओर घुमाया जाता है।
टुकड़ा लेने के बाद रोग के लक्षणों की जांच के लिए माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। त्वचा, वुल्वर और गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर सहित कुछ प्रकार के कैंसर की जांच के लिए पंच बायोप्सी का उपयोग किया जाता है। यह जानकारी इंडियन डेंटल एसोसिएशन मुरादाबाद व धर्मशिला नारायण अस्पताल नई दिल्ली की ओर से आयोजित कार्यशाला में डॉ. अंशुमन कुमार ने दी। वह कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर की गई। आईडीए मुरादाबाद के सचिव डॉ. रोमिल सिंघल ने अध्यक्ष डॉ. आशीष को कॉलर पहनाकर सम्मानित किया। वूमेन डेंटल विंग की चेयरपर्सन डॉ. रजनी को भी कॉलर पहनाया गया। डॉ. अंशुमन ने कहा कि पंच बायोप्सी से कैंसर की सही समय पर जांच की जा सकती है। इससे सही समय पर उपचार शुरू कर रोगी का जान बचाने में मदद मिलती है। कार्यशाला के अंत में आईडीए मुरादाबाद की वूमेन डेंटल विंग की पदाधिकारियों ने शपथ ली व पद ग्रहण किया। डॉ. स्वाति सिंघल ने चेयरपर्सन व डॉ. प्रगति पांडे ने को-चेयरपर्सन की जिम्मेदारी संभाली। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सलमान ने किया। इस मौके पर डॉ. पीएन टंडन, डॉ. केके चौधरी, डॉ. आशुतोष, डॉ. अदनान, डॉ. अभिनय, डॉ. पुलकित आदि मौजूद रहे।