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Moradabad News: आलू किसानों को भारी पड़ सकती बढ़ती ठंड की मार

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मुरादाबाद। पिछले करीब एक सप्ताह से लगातार पड़ रही ठंड का प्रकोप आलू किसानों पर भारी पड़ सकता है। वजह यह है कि उनकी फसल पछेती झुलसा रोग की चपेट में आनी लगी है। हालांकि इसका प्रभाव अभी करीब 20 फीसदी आलू की फसल में ही बताया जा रहा है, लेकिन अगर हालात ऐसे ही रहे तो उनकी काफी फसल इसकी चपेट में आ सकती है। इसके अलावा लाही की फसल में भी तना छेदक कीट का प्रकोप लगने लगा है।
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पिछले कई दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड से आमजन व पशु तो बेहाल हैं ही इसका प्रभाव अब किसानों की फसलों पर भी पड़ने लगा है। जिले में करीब 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में आलू की खेती हो रही है। कृषि विज्ञान केंद्र ठाकुरद्वारा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि पिछले कई दिनोें से पड़ रही कड़ाके की ठंड के साथ बीच-बीच में हल्की धूप खिलने से आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनोें से क्षेत्र के किसानों की आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग लगने की सूचनाएं मिल रहीं हैं। उन्होंने बताया कि इसका प्रकोप इतना अधिक है कि किसानों की करीब 15 से 20 फीसदी फसल इसकी चपेट में आ गई है। उन्होंने कहा कि पत्ती गलना व सूखना इसकी पहचान है। ऐसे में जिन किसानों की आलू की फसल में पछेती झुलसा रोग लगने की शुरुआत हुई है वह अपने खेत में हल्की सिंचाई कर इससे होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं। लेकिन जिन किसानों की आलू की अधिक फसल इसकी चपेट में आ गई है तो ऐसी दशा में किसानों को तत्काल अपने क्षेत्र के कृषि वैज्ञानिकों को फसल को दिखा कर उनकी सलाह के मुताबिक दवा का स्प्रे करा दें।
इधर ठंड के बढ़ते प्रकोप के कारण कुछ किसानों की लाही की फसल में भी पत्ती छेदक रोग लगने लगा है। ठाकुरद्वारा क्षेत्र के रामूवाला सेकू गांव निवासी बलराम चौहान ने बताया कि उन्होंने एक एकड़ लाही की फसल बोयी है। जो फूल आने की अवस्था में पहुंच गई है, लेकिन इसी बीच उसकी लाही की पत्ती में जगह-जगह छेद हो गए हैं। ठाकुरद्वारा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हसन तनवीर ने बताया कि यह मस्टर्ड लीफ माइनर कीट है। यह पत्तियों को धीरे-धीरे खाता है। इससे पौधे की क्लोरोफिल डैमेज होगा। इससे उपज में कमी आएगी। समय से उपचार न होने पर यह फलियों व फूल को भी नुकसान पहुंचाएगा। इससे बचाव के लिए इमिडा क्लोरपिड 0.5 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में घोल कर दोपहर के बाद स्प्रे करें। आलू से झुलसा रोग से बचाव के लिए कार्बेंडाजिन एक ग्राम प्रति लीटर पानी और डायथेन एम-45 तीन ग्राम प्रति लीटर पानी में दोनों को घोल बनाकर उसका दोपहर बाद स्प्रे करें। उन्होंने बताया कि अगर बारिश हो जाती है तो भी आलू की फसल के लिए नुकसानदेह साबित होगी और मौसम कुछ दिन और ऐसा रहता है तो भी सर्वाधिक रूप से आलू और लाही की फसल प्रभावित होगी।
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डॉ. रविंद्र ने बताया कि दिन में अधिकतम तापमान अगर 20 डिग्री सेल्सियस तक रहे तो गेहूं की फसल के लिए यह सबसे अच्छा होता है। लेकिन इसके लिए खेत में नमी बनी रहनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जिले में अभी गेहूं की फसल को इस मौसम से नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। किसान नुकसान से बचने के लिए अपने गेहूं के खेत में हल्की सिंचाई कर सकते हैं।
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