कनपटी पर तमंचा सटाकर बोला... आवाज निकाली तो जान से मार देंगे
गांव हृदयपुर के दो घरों में नकाबपोश डकैतों ने घुसने के साथ ही तमंचों के दम पर दहशत फैला दी। डकैतों ने दोनों घरों में करीब 40 मिनट का वक्त बिना किसी खौफ के गुजारा। तमंचे से धमकाकर सभी को कब्जे में कर लिया। परिवार के सदस्यों के रस्सी से हाथ-पांव बांध दिए। अब्दुल वाहिद के घर में घुसते ही डकैतों में से एक ने वाहिद के बेटे गुलफाम की कनपटी पर तमंचा सटा दिया।
धमकाने वाले अंदाज में कहा-आवाज निकाली तो जान से मार देंगे। गुलफाम के छोटे भाई शाहरुख को रस्सी से बांधकर अलमारी खंगाली। उसमें रखी नकदी समेत 40 हजार के जेवर समेट लिए। विरोध करने पर पेट में गोली मारकर गुलफाम और भाई रिजवान को घायल कर दिया। इससे पहले अबरार के घर में घुसकर उनके हाथ-पैर बांध दिए।
घर में मौजूद उनकी पत्नी नासिरा बेगम, बेटी यासमीन और धेवती को तमंचों से धमकाया। अबरार के घर से दस हजार रुपये नकद, सोने के कुंडल, चेन समेत करीब 70 हजार रुपये के जेवर लूट ले गए। अब्दुल वाहिद के घर डकैतों द्वारा चलाई गई गोली से आसपास के लोगों की आंख खुली।
उनके जुटने तक डकैत भाग गए। ग्रामीणों की सूचना पर कटघर पुलिस मौके पर पहुंची। वाहिद के घर पड़ा मिला डकैतों का तमंचा बरामद किया। एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया ने मौके पर पहुंचकर आसपास कॉम्बिंग कराई लेकिन डकैतों का कुछ पता नहीं चला।
सीढ़ी लगाकर घर में घुसे डकैत
घायल गुलफाम ने बताया कि बड़ा भाई रिजवान अपनी पत्नी अमरीन और तीन बच्चों के साथ बगल के कमरे में सोया था। डकैतों के उसे धमकाने से हुए शोर को सुनकर भाभी और बच्चों की नींद खुली तो वह हालात देख दहशत में आ गए। परिजनों ने बताया कि डकैत मकान के पिछले हिस्से में सीढ़ी लगाकर मकान में अंदर घुसे थे। घर के भीतर चार डकैत घुसे थे। उनके कुछ साथी बाहर खड़े थे। रिजवान और गुलफाम लकड़ी का काम करते हैं। इनके पिता वाहिद करूला में लोहे का काम करते हैं।
डकैतों की तलाश में कैमरों की फुटेज खंगाली
डकैती की घटना के बाद एसएसपी के निर्देश पर पुलिस की टीमों ने आसपास के कैमरों की फुटेज खंगाली। इस मामले में क्राइम ब्रांच की टीम और एसओजी ने सर्विलांस से डकैतों का पता लगाना शुरू कर दिया है। शाम तक डकैतों का सुराग नहीं लगा था।
पुलिस ने लूट की धारा में दर्ज किया केस
डकैती की घटना के बाद कटघर पुलिस ने लूट की धारा में केस दर्ज किया है। पुलिस का मानना है कि डकैतों की संख्या चार थी, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि उनकी संख्या पांच से अधिक थी।