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आत्मा का निर्मल होना ही उत्तम शौच धर्म

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मुरादाबाद। तीर्थकर महावीर यूनिवर्सिटी के रिद्धि सिद्धि भवन में जैनाचार्य विजय धर्मधुरंधर सुरीश्वर महाराज ने मानव के क्रोधित होने के करण बताए। महाराज ने कहां कि मानव की उपेक्षा पूरी न होने के कारण ह्रदय में क्रोध उत्पन्न होता है। उन्होंने राजा की कहानी केे माध्यम से अपेक्षा की पूर्ति न होना क्रोध का मुख्य कारण बताया। उनहोंने कहा कि महावीर भगवान ने क्रोध आने के दस कारण बताए। इसमें अपेक्षा की अपूर्ति मुख्य कारण है। उन्होंने बताया कि क्षमा न करने वाले, क्षमा न लेने वाले दोनों ही व्यक्तियों को नरक मिलता है। क्षमा को किसी धर्म, जाति की बाध्यता नहीं है। यह तो आत्मा का भाव है। क्षमा करने से आत्मसंतुष्टि और शांति की प्राप्ति होती है। प्रतिष्ठाचार्य ऋषभ जैन ने उत्तम शौच की महत्व बताया। उन्होंने कहा कि उत्तम शौच का अर्थ शुद्धि करना होता है। जब लोभ कसाय खत्म होगा, आत्मा शुद्धि होगी तभी शोच धर्म आएगा। किसी भी चीज के प्रति आसक्ति होना लोभ है। इसके साथ ही उनहोंने नवदेवता पूजन,पंचमेरू पूजन,दसलक्षण पूजन कराई। भोपाल से आए रजनीश जैन एंड पार्टी ने मधुर आवाज में झूम रही हैं धरती झूम रहा हैं आसमां जब से गुरू जी का दर्श मिला, लागी री लगन प्रभु थारे नाम की, ढोल बजा के बोल बाबा मेरा है भजनों को गाकर परिसर का माहौल भक्तिमय कर दिया। स्वर्ण कलश से अभिषेक करने का सौभाग्य हर्षित सेठी, संयम जैन, द्वितीय स्वर्ण कलश से अभिषेक अक्षत जैन, तृतीय कलश से अभिषेक आयुष जैन, हिमांशु जैन, चतुर्थ स्वर्ण कलश से अभिषेक का सौभाग्य हर्षित जैन ने प्राप्त किया। शांतिधारा करने का सौभगय संचित जैन,निशांत जैन, ऋतिक जैन,विनायेक जैन, शुभम जैन, अरूण जैन ने किया। कल्चरल ईवनिंग में डेंटल कॉलेज के विद्यार्थियों ने नाटक के माध्यम से वीर से महावीर तक के सफर का चित्रण किया। नाटक के जरिए उन्होंने बताया कि बल से वीर, यश और वैभव से वर्धमान, समझ से सन्मति, अतिवीर से वे महावीर बने। विद्यार्थियों ने धरती सुनहरी अंबर नीला, धरती ऐसा देश है मेरा गाकर देशभक्ति की अलख जगाई। ऋचा जैन ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। मुख्य अतिथि के रूप में राजीव जैन, लता जैन रहे। इस दौरान एसके जैन, नीलिमा गहलोत, डॉ. रामाकृष्णा यलूरी, उपेंद्र, तनवीर, डॉ. मनीष गोयल, डॉ. विपिन जैन, डॉ रत्नेश जैन, सुरेश जैन, वीना जैन, डॉ. सलभ मेहरोत्रा मौजम रहे। कार्यक्रम का समापन आरती,भक्तांबर पाठ के साथ किया गया।
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