सवाल : क्या गायन और संगीत आपको विरासत में मिला।
जवाब : हां.. मेरे मां-पापा बहुत अच्छा गाते हैं, लेकिन किसी ने प्रोफेशनली इसे नहीं अपनाया। मुझे बचपन से गायन, वादन, पेंटिग, स्केचिंग का शौक रहा। मैं यहां बैठे-बैठे हूबहू आपका स्कैच बना सकती हूं। सबसे ज्यादा पसंद गायकी रही तो इसमें कॅरिअर बनाने का सपना देखा।
सवाल : उभरते कलाकारों को सोशल मीडिया से कितनी मदद मिलती है।
जवाब : मेरा मानना है कि सोशल मीडिया नहीं दर्शक और श्रोता किसी भी कलाकार को आगे बढ़ाते हैं। वरना हमारे समाज में सोशल मीडिया पर तो कला से ज्यादा अश्लीलता देखी जाती है।
सवाल : हिट हरियाणवी गीतों के बाद क्या बॉलीवुड से कोई ऑफर आया।
जवाब : हंसते हुए... अभी तक तो नहीं, लेकिन बहुत जल्द गुजराती में मेरा एक गाना रिलीज होने वाला है। सारेगामापा से भी कॉल आ रहे हैं। मैं उत्तराखंड की हूं, लेकिन यदि देवनागरी लिपि में किसी भी भाषा को लिखकर देंगे तो आसानी से गा दूंगी, चाहे मुझे उसका अर्थ न पता हो।
सवाल : उत्तर भारत में हरियाणवी गीत खूब पसंद किए जाते हैं, बाकी राज्यों से कैसा अनुभव मिलता है।
जवाब : साउथ में भी कई लोग कुछ चुनिंदा गानों को पसंद करते हैं। अभी एक वीडियो मैंने देखा था। गोवा में एक पार्टी में बैकग्राउंड में मेरा गाना बज रहा था। ऐसा देखकर बहुत खुशी होती है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश में लोग पसंद करते हैं, लेकिन उत्तराखंड सरकार या संस्थाओं की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलता। अपनाें का समर्थन न मिलना खलता है।
सवाल : पुराने गानों को लोग अब भी मन से सुनते हैं, नए गीतों को जल्दी भूल जाते हैं। गीतों को सदाबहार बनाने के लिए क्या किया जा सकता है।
जवाब : मैं अपनी बात करूं तो गाने चुनकर गाती हूं। मुझे पता है कि कौनसा गाना मुझे गाना है, लेकिन ज्यादा रिजेक्शन से कभी-कभी हम कुछ अच्छा खो देते हैं। गीतों को यादगार बनाने की बात रही तो रचनाकार, संगीतज्ञ, गायक, निर्देशक सभी को काम करना होगा। भेदभाव व नेपोटिज्म के कारण आज भी कई अच्छा लिखने वाले, अच्छा गाने वाले बहुत पीछे हैं।
सवाल : आगे के सफर को किस तरह देखती हैं।
जवाब : मेरा सपना है कि हर दूसरा मंच मेरा हो। मुझे सुनने के लिए लोगों की भीड़ लगे। बॉलीवुड में मेरी आवाज के जरिये मेरा चेहरा भी लोगों के सामने आए।