ठाकुरद्वारा। नगर के रामलीला मैदान में स्थित राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के भवन में चिकित्सालय के सीएचसी से स्थानांतरण का मामला लटक गया है। इसका कारण राजस्व अभिलेखों में चिकित्सालय भवन की भूमि का रिकॉर्ड न मिलना बताया गया है। करीब 35 वर्ष पहले नेत्र चिकित्सालय के लिए ठाकुरद्वारा निवासी आईएएस लक्ष्मीकांत नागर ने अपनी भूमि दान में दी थी। बाद में इसमें राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय खोल दिया गया जो 30 वर्ष से लगातार उसमें चल रहा था लेकिन उसका भवन चार वर्ष पूर्व क्षतिग्रस्त हो जाने पर उसे नगर के सीएचसी में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में यह वहीं पर चल रहा है। सीएचसी में एक कमरे में ही यह चिकित्सालय चला है। वहां पर मरीजों और डॉक्टरों के बैठने की कोई उचित व्यवस्था नहीं है। धूप और बारिश में मरीज खड़े रहते हैं। भाजपा के पूर्व नगर अध्यक्ष उमेश गुप्ता ने अपर जिलाधिकारी प्रशासन से राजकीय चिकित्सालय के खस्ताहाल भवन की मरम्मत का आदेश करवाया जिस पर नगर पालिका ने इस भवन की मरम्मत कर दी। करीब एक वर्ष पूर्व मरम्मत का काम पूरा हो गया था। उस समय के डॉक्टर और कर्मचारियों ने यह कहकर उस भवन में जाने से मना कर दिया था कि उसमें विद्युत कनेक्शन नहीं है। तब से यह मामला अटका हुआ है जिलाधिकारी ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को आदेश दिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के आदेश पर जिला होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी बीएस मलिक अपनी टीम के साथ करीब डेढ़ माह तक पुराने राजकीय चिकित्सालय भवन का निरीक्षण करने पहुंचे उन्हें भवन सही स्थिति में मिला लेकिन उन्होंने जब वहां विद्युत कनेक्शन के लिए आवेदन कराया तो विद्युत विभाग ने उनसे चिकित्सालय की भूमि संबंधी दस्तावेज निर्माण प्रस्तुत करने को कहा। जिला होम्योपैथिक अधिकारी का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार उप जिलाधिकारी ठाकुरद्वारा और राजस्व विभाग से संपर्क किया लेकिन उसमें चिकित्सालय के भवन की भूमि का रिकॉर्ड नहीं मिल सका है। उन्होंने बताया कि इस बारे में अपने विभाग के लखनऊ कार्यालय को अवगत करा दिया है। वर्तमान उप जिलाधिकारी को भी रिमाइंडर भेज कर उनसे अस्पताल चिकित्सालय के भूमि के बारे में स्पष्ट जानकारी देने को लिखा है। इस कारण होम्योपैथिक चिकित्सालय के पुराने भवन में स्थानांतरित होने का मामला लटक गया है।