हज पर जाने के लिए आवेदन करने वालों को इस बार जिला अस्पताल के मेडिकल प्रमाणपत्र के अलावा अपने स्वास्थ्य से संबंधित स्वयं के हस्ताक्षर अथवा अंगूठा निशान के साथ घोषणापत्र भी देना होगा। अगर घोषणापत्र में किसी तरह की कोई जानकारी गलत मिलती है तो हज यात्रा भी रद्द हो सकती है।
हज कमेटी ऑफ इंडिया के इस नए फरमान से हज पर जाने वालों में असमंजस की स्थिति है। ऐसा पहली बार हुआ है। हज यात्रा को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। हज कमेटी ऑफ इंडिया ने हज आवेदकों की सूची भी कुछ दिन पहले जारी की थी। जिसके मुताबिक प्रदेश में हज पर जाने के लिए सबसे अधिक 2030 आवेदन मुरादाबाद के लोगों ने किया है।
इसमें करीब 45 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। हज कमेटी ऑफ इंडिया ने इन सभी हज आवेदकों से नौ फरवरी तक पहली किश्त के रूप में 81,800 रुपये हज कमेटी ऑफ इंडिया के खाते में जमा करने को कहा है। आवेदकों को हज पर जाने के लिए सरकारी अस्पताल के चिकित्सक (एलोपैथ) के द्वारा जारी मेडिकल प्रमाणपत्र तो जमा करना ही होगा।
साथ ही इस बार हज कमेटी ऑफ इंडिया ने एक नया आदेश जारी किया है। जिसके मुताबिक हज आवेदकों को मेडिकल प्रमाणपत्र के अलावा स्वयं के हस्ताक्षर अथवा अंगूठा निशान के साथ घोषणापत्र देना होगा। पांच बिंदु वाले इस घोषणा पत्र का प्रोफार्मा भी हज कमेटी ऑफ इंडिया की ओर से अपनी वेबसाइट पर मेडिकल प्रमाणपत्र के प्रोफार्मा की तरह ही अलग से जारी किया गया है।
इस घोषणापत्र के साथ मेडिकल प्रमाणपत्र, जमा धनराशि की रसीद, पासपोर्ट आदि के साथ आवेदक को आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी 12 फरवरी तक प्रदेश हज कमेटी कार्यालय में जमा करनी होगी।