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Moradabad News: डेनियल व हैरी बताकर महंगे दामों में बेच दिए मोती-शेरू

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मुरादाबाद।
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शहर में धोखाधड़ी का एक अलग तरह का मामला सामने आया है। एक गिरोह ने आवारा कुत्तों के पिल्लों को रंग कर उन्हें लेब्रा डॉग बताकर महंगे दामों में बेच दिया। एक पिल्ले को तीन से चार हजार रुपये में बेचा गया। कई लोग आसानी से इस गिरोह के झांसे में आ गए, जबकि कुछ लोग डॉक्टर के पास पहुंचे तो सारा मामला खुल गया।



गिरोह के सदस्य शहर के अलग अलग चौराहों पर खड़े होकर पपी बेचने के लिए लोगों से बातचीत करते हैं। इनमें से एक ने रविवार को महाकालेश्वर धाम मंदिर के पास बुद्धि विहार निवासी नतिन को 3000 रुपये में मामूली स्ट्रीट डॉग का पपी बेच दिया। नतिन अगले दिन पशु चिकित्सक के पास पहुंचे तो पता चला कि यह तो साधारण पपी है। अगले दिन फिर एक चौराहे पर उसी व्यकित को देखा गया। इस बार तो नतिन व उनके साथ के लोगों ने ठग से बातचीत शुरू की। कॉल करके पीपुल फोर एनीमल एनजीओ के सदस्यों व पुलिस को बुलाया और धोखाधड़ी के बारे में बताया। माफी मांगने पर लोगों ने उसे छोड़ दिया, लेकिन पुलिस ने चेतावनी दी कि अगली बार शिकायत आई तो जेल जाना पड़ेगा। पुलिस उसकी निगरानी कर रही है। उसके जरिये गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
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रामगंगा विहार निवासी आदित्य ने बताया कि 27 जुलाई को सेल्स टैक्स चौराहे के पास वह अपने दोस्तों के साथ खड़े थे। तभी एक व्यक्ति गोद में दो छोटे छोटे पपी लेकर आया और उनसे खरीदने के लिए पूछने लगा। प्रजाति पूछने पर उसने लेब्रा डॉग बताई। कीमत 3000 रुपये शुरू की और 2500 में दे दिया। दो दिन बाद पपी बीमार हुआ तो आदित्य उसे डॉक्टर के पास ले गए। वहां पता चला कि यह स्ट्रीट डॉग है।



बुद्धि विहार निवासी नतिन ने कहना है कि रविवार को महाकालेश्वर धाम मंदिर के पास किसी काम से गए थे। वहां एक व्यक्ति उनसे मिला। उसने गहरे काले रंग का पपी लेब्रा डॉग बताकर उन्हें बेचने की पेशकश की। देखकर वह पहचान नहीं पाए और ठग के एक बार कहने पर ही उन्होंने पपी खरीद लिया। अगले दिन रंग उतरा पता चला कि यह स्ट्रीट डॉग है। अब अलग तरह से पपी की देखरेख शुरू की है।

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45 से 60 दिन तक स्ट्रीट डॉग, लेब्रा व कुछ अन्य प्रजातियों के पपी लगभग एक जैसे लगते हैं। इस कारण पहचानना मुश्किल होता है। जब भी आप पपी खरीदें तो पहले डॉक्टर के पास लाकर उसकी जांच करा लें। कुछ मामलों में नाखून, पंजे, कान व पूंछ देखकर पहचान की जा सकती है। - डॉ. विनेश यादव, पशु चिकित्सक
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मैं पीपुल फोर एनीमल संस्था चलाती हूं। पिछले कुछ दिनों में चार-पाच मामले मेरे सामने आए, जिनमें लेब्रा डॉग के नाम पर लोगों ने देशी पपी खरीद लिए। मैंने लोगों को जागरूक किया और पुलिस को सूचित किया। - करुणा शर्मा, हेड, पीएफए एनजीओ
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