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Moradabad News: छह माह से बिना पंजीकरण चल रहे 100 से अधिक अस्पताल

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मुरादाबाद। छह माह से जिले में 100 से अधिक अस्पताल व क्लीनिक बिना पंजीकरण चल रहे हैं। अप्रैल 2024 तक इन अस्पतालों का पंजीयन नवीनीकरण होना था, लेकिन इन अस्पतालों के संचालकों ने पंजीयन नवीनीकरण नहीं कराया। विभाग ने भी अस्पतालों को बंद कराने की जहमत नहीं उठाई। ऐसे में तमाम अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है।
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बुधवार को पाकबड़ा में सील किया गया आयुष्मान अस्पताल पहले विभाग में पंजीकृत था, लेकिन विभाग ने पंजीयन नवीनीकरण व सत्यापन पर कोई ध्यान नहीं दिया। छह माह बाद आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के आधार पर अस्पताल को सील किया गया। इसी तरह ठाकुरद्वारा के एबीएम अस्पताल का पंजीयन भी नर्स से दुष्कर्म की घटना से महज 15 दिन पहले ही किया गया था।
नवीनीकरण के समय यह ध्यान नहीं दिया गया कि कौन डॉक्टर वहां मरीजों को देखने के लिए अधिकृत हैं और कौन इलाज रहे हैं। मुरादाबाद शहर, पाकबड़ा, बिलारी, कुंदरकी, कांठ, मूंढापांडे, ठाकुरद्वारा में ऐसे कई अस्पताल व क्लीनिक चल रहे हैं। विभाग में चर्चा है कि बिना रुपये दिए पंजीकरण के लिए संचालकों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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एक ही डॉक्टर के दस्तावेजों पर चल रहे चार-चार अस्पताल

जिले में एक ही डॉक्टर के दस्तावेजों पर चार-चार अस्पताल संचालित होने की शिकायतें भी सीएमओ कार्यालय में आई हैं। सवाल यह है कि एक ही डॉक्टर का नाम कई अस्पतालों के पैनल में कैसे हो गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आयुष्मान अस्पताल में जिस स्त्री व एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के दस्तावेज लगे हैं, वह मुंबई में रहती हैं। मुरादाबाद उनका आना-जाना नहीं होता, ऐसे में कौन डॉक्टर अस्पताल में डिलीवरी कर रही थीं, किसी को नहीं पता। स्वास्थ्य विभाग इस मामले की जांच पड़ताल कर रहा है।
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बंद अस्पताल की सील खुलने पर एडी हेल्थ से शिकायत

पाकबड़ा में आयुष्मान अस्पताल की बंद सील को संचालक ने बुधवार देर रात खोलने की कोशिश की। ऐसा आरोप लगाते हुए एक व्यक्ति ने एडी हेल्थ से शिकायत की। उसने मामले की वीडियो भी उपलब्ध कराई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि आयुष्मान अस्पताल के पास 500 मीटर की परिधि में चार झोलाछाप अस्पताल चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। एडी हेल्थ डॉ. ऋतु कत्याल का कहना है कि वह अवकाश पर हैं। कार्यालय पहुंचने के बाद मामले को देखेंगी।
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हर अस्पताल व क्लीनिक से संबंधित सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। भौतिक निरीक्षण के बाद ही पंजीयन नवीनीकरण किया जा रहा है। जिसमें खामी पाई जा रही है, उसे रिजेक्ट कर रहे हैं। आयुष्मान अस्पताल के मामले में जांच के बाद और तथ्य स्पष्ट होंगे। - डॉ. संजीव बेलवाल, डिप्टी सीएमओ
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