शहर के विभिन्न स्थानों पर बकरों का बाजार सजने लगा है। शहर के ईदगाह चौराहा पर सोमवार लगे बकरा बाजार में यूं तो विभिन्न प्रजातियों के बकरे बिकने लाए गए थे, लेकिन खरीदारों का जोर बकरों की नस्ल पर कम बल्कि उसकी खूबसूरती और तंदुरुस्ती पर अधिक है। बकरीद पर मुस्लिम समुदाय के लोग बकरों की कुर्बानी देते हैं।
बकरा पालकों को भी इसके लिए साल भर से इंतजार रहता है। इसकी वजह यह है कि कुर्बानी के लिए बकरा खरीदने वालों से उन्हें बेहतर दाम मिल जाता है। कुंदरकी निवासी भूरा भी बकरा बाजार में अपना बकरा लेकर बेचने आए थे। उन्होंने बताया कि जिस बकरे का दाम दो-माह पहले 25 हजार रुपये लगाया जा रहा था उसे शहर के एक एक्सपोर्टर के परिवार वाले 35 हजार में खरीद कर ले गए। उसका बकरा देखने में बड़ा और सुंदर लग रहा था।
करुला निवासी ओवैस भी अपने साथ औसत दर्जे के छह बकरों को लेकर ईदगाह बेचने पहुंच ग्राहकों की प्रतीक्षा करते रहे। उन्हाेंने अपने बकरों की कीमत 15-17 हजार रुपये के बीच बताई। उन्होंने बताया कि बकरा पालना भी अब महंगा हो गया है। उसका दाना, पत्ता सब महंगा हो गया है, लेकिन रेट अभी पिछले साल की तरह ही मिल रहे हैं। उसे उम्मीद है कि जब दो-चार दिन शेष रह जाएंगे तो बकरे के दाम कुछ बढ़ेंगे।
शहर के इन स्थानों से ईदगाह बिकने आ रहे बकरे
ईदगाह पर सोमवार अधिकांश तौर पर करूला, मैनाठेर, डींगरपुर, डोमघर, मुरादाबाद देहात, कुंदरकी, बिलारी से लोग करीब 400 बकरे बेचने लाए। इनमें से करीब 150 बकरों की सोमवार बिक्री हुई। इनमें अधिकांश बकरों की कीमत 15 हजार रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक रही।
इन नस्लों के बेचने लाए गए बकरे
बकरा बेचने पहुंचे लोगों ने उनके बकरों की नस्ल पूछने पर पहाड़ी, तोतापरी, देसी, बरबरे, बोटिया और अबलक बताया। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्र में इन्हीं नामों से बकरों की नस्ल बताई जाती है।