गांव वालों का कहना है कि एक जमाने में अहमद रजा के दादा लियाकत हुसैन का गांव में दबदबा था। गांव की सियासत की बात हो या फिर सामजिक। लियाकत हुसैन की चर्चा के बिना अधूरी थी। लियाकत हुसैन तीन बार गुलड़िया ग्राम पंचायत के प्रधान रहे थे।
लेकिन पहले बेटे फिरासत हुसैन की आपराधिक गतिविधियां में संलिप्तता और अब पोते के संदिग्ध आतंकी निकले जाने के बाद दादा के उस जमाने की चर्चा हो रही है। जब वह गांव की सियासत की बागडोर संभाल रहे थे। बच्चों की अच्छा परवरिस और शिक्षा दिलाने पर जोर देते थे।
लोग उनसे राय लेने उसके घर आते थे। लेकिन वक्त बदल चुका है। अब इस परिवार से पूरे गांव ने दूरी बना ली है। अहमद रजा के पिता फिरासत हुसैन को एटीएस ने पूछताछ के लिए लखनऊ बुलाया था। जिसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था लेकिन हिस्ट्रीशीट पिता अब तक घर नहीं पहुंचा है। अहमद रजा का बड़ा सद्दाम भाई और जुनैद रामपुर में रह रहे हैं।
घर में केवल महिलाएं ही हैं। गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें डर है कि कहीं इनसे संपर्क रखने पर हम भी शक के घिरे में न आ जाएं। इस लिए उस गली से भी अब कम ही निकलता होता है। रिश्तेदार भी परिवार की खैर खबर फोन पर नहीं ले रहे हैं। वो खुद दो चार मिनट के लिए घर आकर जानकारी करते हैं या फिर गांव के अन्य लोगों के जरिए ही पूछताछ कर रहे हैं।