समाजसेवी एवं शिक्षाविद डॉ. अरविंद गोयल ने 25 साल पहले ही ठान लिया था कि वह एक दिन अपनी सारी संपत्ति दान कर देंगे। ऐसा ख्याल उनके मन में ट्रेन में सफर के दौरान एक गरीब को ठंड में ठिठुरता देखकर आया था। तत्काल उसे अपने जूते तक दे दिए थे।
उस घटनाक्रम पर चर्चा करते हुए डॉ. अरविंद गोयल ने बताया कि वो दिसंबर की ठंडी रात थी। मैं जैसे ही ट्रेन में सवार हुआ। सामने देखा कि एक गरीब आदमी ठंड से ठिठुर रहा है। उसके पास न तो चादर थी और न ही पैरों में चप्पल या जूते थे। उस आदमी को देखकर मुझसे रहा नहीं गया। मैंने अपने जूते उतार कर उसे दे दिए। कुछ देर तक तो मैंने सहन किया, लेकिन कड़ाके की ठंड होने की वजह से मेरी भी हालत खराब होने लगी।
डॉ. अरविंद ने कहा कि तब मैंने सोचा कि इस सामने वाले आदमी की तरह तमाम लोग ऐसे ही ठंड में ठिठुरते होंगे। मैं घर पहुंचा, लेकिन उस आदमी की सूरत मेरे जहन से नहीं निकल रही थी। इसके बाद मैंने बेसहारा और गरीबों के लिए काम शुरू कर दिया। बुजुर्गों के लिए वृद्धाश्रम बनवाया। छात्र-छात्राओं को किताबें, कॉपी और कपड़े बांटने शुरू कर दिए।
उन्होंने कहा कि उस दिन से ठंड हो, गर्मी हो या बारिश हो, मैं रोज अपने घर से निकला। सड़क किनारे बैठे लोगों की आर्थिक मदद, फल, सब्जी बेचने वाले बुजुर्ग महिला-पुरुषों की मदद की। लंबे समय से समाजसेवा करने के दौरान गरीबों और बेसहारा लोगों की मुझे बहुत दुआएं मिलीं। मैं और मेरे परिवार ने भी खूब तरक्की की। अब मैंने सोच लिया है कि अपनी सारी संपत्ति दान कर दूंगा। इसके लिए मैंने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर मांग रखी है। जिला प्रशासन शासन से अनुमति लेगा। इसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।