केस एक
पुलिस चौकी के पास हत्या कर सिर काट ले गए हत्यारोपी
सिविल लाइंस की फकीरपुरा पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर रविवार सुबह सिर कटी लाश मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि गर्दन काटने से पहले उसके पेट पर चाकू से वार किए गए थे। तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अब तक कातिलों तक पहुंचना तो दूर मृतक की पहचान तक नहीं करा सकी है।
केस दो
दस माह पहले भी एक युवक की हत्या कर जलाया था शव
पिछले साल भी इसी क्षेत्र में एक युवक की हत्या की गई थी। कातिलों ने पहचान छिपाने के उद्देश्य से उसका शव जलाया था। 15 जुलाई 2022 को फकीरपुरा पुलिस चौकी से 477 कदम दूरी पर कूड़े के घेर में 25 वर्षीय युवक की लाश मिली थी। लाश अधजली हालत में मिली थी। अब तक मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस ने शुरुआत में तो इस केस पर काम किया था। घटनास्थल की ओर जाने वाले रास्तों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली थी लेकिन पुलिस को कोई सफलता नहीं मिल पाई थी। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
केस तीन
गला रेत की गई थी युवती की हत्या
मझोला थाना क्षेत्र के विशनपुर में 17 जुलाई 2022 को 25 वर्षीय एक युवती की लाश मिली थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से गला रेतकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई थी। युवती ऑनर किलिंग का शिकार हुई थी या फिर किसी ने उसे धोखे से यहां बुलाकर मौत के घाट उतार था। अब तक पुलिस हत्याकांड का खुलासा नहीं कर पाई है। हैरानी की बात है कि किसी परिवार ने भी कभी कोई संपर्क नहीं किया कि उनकी लड़की लापता है।
केस चार
महिला और बच्ची की हत्या, पुलिस ने लगा दी एफआर
दस साल पहले मझोला के मंगूपुरा स्थित बंद फैक्टरी में 35 वर्षीय महिला और दस वर्षीय बच्ची के शव मिले थे। पोस्टमार्टम से पता चला था कि दोनों को गला घोंटकर मौत के घाट उतारा गया था। पुलिस और फोरेंसिक टीम को जांच पड़ताल में हाईवे से फैक्टरी के पास से किसी वाहन से टायरों के निशान मिले थे। दोनों की पहचान न होने के कारण पुलिस को भी केस में एफआर लगाने का मौका मिल गया था। दो साल बाद ही पुलिस ने केस दर्ज बंद कर दिया था।
केस पांच
ढेला नदी के किनारे मिला था महिला का शव
भगतपुर थाना क्षेत्र के चांदपुर गढ़ी के पास ढेला नदी के किनारे चार अक्तूबर 2022 को एक महिला का शव मिला था। महिला को गला घोंटकर मौत के घाट उतारने के बाद उसका शव बोरे में बांधकर ढेला नदी के किनारे फेंक दिया था। अब तक महिला की पहचान नहीं हो पाई है।
मृतकों की पहचान नहीं होने पर केस को ठंडे बस्ते में डाल देती है पुलिस
मृतकों की पहचान होने पर उसके परिजन बार बार पुलिस से संपर्क करते हैं। थाने, चौकी में सुनवाई न होने पर अफसरों से मिलते हैं। जिस कारण पुलिस केसों पर लगातार काम करती रही है और खुलासा होने की संभावनाएं अधिक होती हैं। परिवार के लोगों से केस से संबंधित कई जानकारी मिल जाती हैं। मृतकों की पहचान नहीं होने पर पुलिस पर परिवार की ओर से कोई दबाव नहीं होता है। जिस कारण पुलिस केस को ठंडे बस्ते में डाल देती है।
आस पड़ोस के जनपदों में भी शव मिलने की सूचनाएं भेजी गईं हैं। ताकि कोई लापता हो तो उसके परिजन मृतकों के कपड़े और फोटो देखकर पहचान कर सकें। अब तक पहचान कराने में सफलता नहीं मिल पाई है। पहचान होने के बाद ही कड़ी से कड़ी जोड़कर हत्या कांड का खुलासा हो सके। हेमराज मीना, एसएसपी