मकर संक्रांति का पर्व इस बार रविवार 15 जनवरी को भी मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि पंचांग के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी की रात 8 बजकर 21 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ऐसे में उदया तिथि के कारण 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। मकर संक्रांति का पर्व देशभर में विभिन्न तरीके से मनाया जाता है। साल का पहला पर्व के रूप में मकर संक्रांति होती है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति होती है। इसके साथ ही खरमास समाप्त हो जाते हैं और शादी, मुंडन, छेदन जैसे मांगलिक और शुभ काम होना शुरू हो जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन स्नान के साथ दान करना काफी शुभ माना जाता है। इस दिन ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलने के साथ पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन स्नान दान का विशेष महत्व है। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि करके साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लें। अगर आप गंगा स्नान कर लें, लेकिन किसी कारणवश गंगा स्नान के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घर में ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल डाल लें। स्नान करने के बाद भगवान सूर्यदेव की विधिवत पूजा करनी चाहिए। इसके लिए एक तांबे के लोटे में जल, थोड़ा तिल, सिंदूर, अक्षत और लाल रंग का फूल डालकर अर्घ्य दें। इसके साथ ही भोग लगाएं। पूजा पाठ करने के बाद अपनी योग्यता के अनुसार दान करें। ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिकेश शुक्ल ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन मुहूर्त पर अन्न, तिल, गुड़, वस्त्र, कंबल, चावल, उड़द की दाल, मुरमुरे के लड्डू आदि का दान करें।
ऐसा करने से सूर्य के साथ-साथ शनिदेव भी प्रसन्न होंगे। महा पुण्य काल 15 जनवरी को सुबह 7 बजकर 17 मिनट से सुबह 9 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। पुण्य काल का समय 15 जनवरी को सुबह 7 बजकर 17 मिनट से शाम 5 बजकर 55 मिनट तक रहेगा।