पूर्व विधायक उस्मान उल हक दो माह की पेरोल काटने के बाद सोमवार शाम वापस जेल पहुंच गए। हिस्ट्रीशीटर मौअज्जम की हत्या में उस्मान और उनके चार साथियों को उम्रकैद की सजा हुई है। करीब सात साल से जेल में बंद उस्मान को शासन के आदेश पर छह जनवरी को पहली बार पेरोल पर जेल से रिहा किया गया था।
उस्मान को एक माह की पेरोल मिली थी जिसे शासन ने बाद में एक माह और बढ़ा दिया था। देहात सीट से सपा के विधायक रह चुके उस्मान उल हक को वर्ष 2001 में हुई पीपलसाना के हिस्ट्रीशीटर मौअज्ज्म की हत्या में उम्रकैद हुई थी। करीब सात साल पहले फैसला आने के बाद से ही वह जेल में बंद हैं।
पूर्व विधायक का विरोधी हाजी जहांगीर गुट भी जेल में बंद है। हाजी जहांगीर व उसके साथियों को उस्मान उल हक के चाचा अजीमुल हक की हत्या में उम्रकैद की सजा हुई है। हिस्ट्र्रीशीटर मौअज्ज्म को भी हाजी जहांगीर के साथ अजीमुल हक हत्याकांड में उम्रकैद हुई थी।
लेकिन हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर आने के दौरान ही उसकी हत्या कर दी गई थी। शासन ने दिसंबर में हाजी जहांगीर की पेरोल मंजूर की थी जिसके कुछ दिन बाद उस्मान उल हक की भी पेरोल मंजूर हो गई थी। दोनों को पहले एक - एक माह के लिए पेरोल पर छोड़ा गया था।
बाद में दोनों की ही पेरोल अवधि एक - एक माह बढ़ा दी गई थी। जेलर ने बताया कि पूर्व विधायक उस्मान पेरोल की अवधि पूरी होने पर सोमवार को तय वक्त पर जेल लौट आए हैं। इससे पहले हाजी जहांगीर भी पेरोल खत्म होने पर जेल लौट चुका है।