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डीआईजी और एसएसपी की मानीरटिंग हुई फेल

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मुरादाबाद। खनन की गाड़ी को रोकने पर एसडीएम और खनन अधिकारी के साथ मारपीट की घटना को सीएम योगी आदित्यनाथ ने तो गंभीरता से लिया, लेकिन स्थानीय स्तर पर आला अधिकारियों ने हल्के में ही लिया। न तो इनामी खनन माफिया को पकड़ने में सक्रियता दिखाई और न ही खनन माफिया से जुड़े लोगों को सूचीबद्ध किया गया। यही नहीं उत्तराखंड पुलिस के साथ कोई मीटिंग तक नहीं की गई। इस प्रकरण में डीआईजी और एसएसपी की मानीटरिंग फेल साबित हुई है।
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ठाकुरद्वारा रोड पर पुलिस की मिलीभगत से खनन का खेल कोई नया नहीं है। एक दशक से रोड की तीन पुलिस चौकियां खनन के लिए पहले से बदनाम हैं। 13 सितंबर को जिला खनन अधिकारी अशोक कुमार ने जब अवैध ढंग से संचालित डंपरों को पकड़ा तो मौके पर एसडीएम भी आ गए। उस समय खनन माफिया से जुड़े लोगों ने दोनों अधिकारियों के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार किया। मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचने पर पुलिस सक्रिय हो गई। मुकदमे के बाद नौ लोगों पर 50-50 हजार का इनाम घोषित कर दिया गया। लेकिन स्थानीय स्तर पर कार्रवाई रिपोर्ट दर्ज कराने और इनाम घोषित करने तक ही सिमट कर रह गई। बरेली एसटीएफ ने पीलीभीत से पचास हजार के इनामी खनन माफिया आबिद को पकड़ा तो मुरादाबाद पुलिस ने हरकत में आई। बिना किसी योजना के खनन माफिया को पकड़ने उत्तराखंड पहुंच गई। जहां पुलिस को मुंह की खानी पड़ी।
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