मुरादाबाद। मुरादाबाद के जिला अस्पताल के पीछे बनाए गए एल-2 कोविड अस्पताल में न तो डमी मरीज को लेकर एंबुलेंस पहुंची। न ही दवाओं की उपलब्धता पर ध्यान दिया गया। मरीज को भर्ती करने से लेकर उपचार शुरू करने तक का रेस्पांस टाइम भी नहीं देखा गया।
देश भर में 10 व 11 अप्रैल को कोरोना से लड़ाई के लिए स्वास्थ्य विभाग के इंतजाम परखे गए। मॉक ड्रिल के दौरान एंबुलेंस डमी मरीज को लेकर अस्पताल पहुंचती है। मरीज को स्ट्रेचर के जरिये वार्ड तक लाया जाता है। पल्स व बीपी चेक करके ऑक्सीजन बेड पर लाकर उपचार शुरू किया जाता है। इससे रेस्पांस टाइम का पता चलता है।
मुरादाबाद में भी मंगलवार को मॉक ड्रिल हुई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने ऑक्सीजन प्लांट व कुछ मशीनें देखकर मॉकड्रिल की इतिश्री कर ली। यहां के एल-2 कोविड अस्पताल में इस तरह की प्रकिया नहीं अपनाई गई। 10 बजे से मॉक ड्रिल शुरू होनी थी। करीब साढ़े 11 बजे स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ. सीमा अग्रवाल एल-2 अस्पताल में पहुंचीं। डिप्टी सीएम डॉ. संजीव बेलवाल व टीम ने उन्हें बेडों पर ऑक्सीजन की सप्लाई दिखाई। बाई पेप व हाई फ्लो नेजल कैनुला (एचएफएनसी) मशीन की क्रियाशीलता दिखाई। इसके बाद मॉकड्रिल संपन्न मान ली गई। हालांकि जेडी डॉ. सीमा अग्रवाल ने अस्पताल में पानी की उपलब्धता व अन्य सुविधाओं के विषय में भी पूछा। कुछ बिंदुओं पर काम करने के निर्देश दिए।
मॉक ड्रिल पूरी होने के बाद जेडी डॉ. अग्रवाल, सीएमओ डॉ. एमसी गर्ग के कार्यालय में पहुंचीं। दवाओं की उपलब्धता के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि उसे चेक किया जाएगा। वहीं डमी मरीज व दूसरी प्रक्रिया पर डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल ने कहा कि यह निर्देशों में शामिल नहीं है।
100 बेड उपलब्ध, ऑक्सीजन प्लांट भी सक्रिय
मॉक ड्रिल के दौरान डिप्टी सीएम ने बताया कि मुरादाबाद के एल-2 अस्पताल में 100 ऑक्सीजन बेड हैं। हर बेड पर ऑक्सीजन कंसंट्रेटर हैं। गंभीर मरीजों के लिए हाई फ्लो नेजल कैनुला व बाई पेप मशीनें हैं। दूसरी लहर में इन मशीनों के जरिये कई जिंदगियां बचाई गई थीं। उन्होंने बताया कि 560 व 1000 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन क्षमता वाले प्लांट भी सक्रिय हैं। ऑक्सीजन प्लांट फेल होने की स्थिति में बैकअप के लिए सिलिंडर हैं। वहां से भी सप्लाई न होने पर टैंक से सप्लाई करने की व्यवस्था है।
डमी मरीज के जरिये मॉक ड्रिल करने के निर्देश नहीं हैं। अन्य सभी व्यवस्थाएं जांची गईं। ऑक्सीजन प्लांट व मशीनें सक्रिय हैं। जरूरत पड़ने पर 100 मरीजों को भर्ती किया जा सकता है।
- डॉ. संजीव बेलवाल, डिप्टी सीएमओ