मुरादाबाद। शहर में हो रहे अवैध निर्माण का पता लगाने के लिए एमडीए शहर का रिमोट सेंसिंग सर्वे कराएगा। इसरो के सेटेलाइट की मदद से प्रदेश के साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग की टीम यह सर्वे करेगी। इसमें हर घर की निगरानी होगी और इसकी जानकारी एमडीए के कंट्रोल रूम को दी जाएगी। सर्वे से मिली सूचना के आधार पर एमडीए की टीम माैके पर जाकर जांच करेगी और फिर कार्रवाई की जाएगी।
एमडीए के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में विभाग के पास स्टाफ की कमी है। जेई प्रत्येक क्षेत्र पर नजर नहीं रख सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के साइंस एंड टेक्नालॉजी विभाग से मदद ली जा रही है। लखनऊ से विभाग की एक टीम शहर में सर्वे के लिए आएगी। यह टीम एक माह तक शहर का सर्वे करेगी। इसके बाद इसरो के सेटेलाइट की मदद से तीन माह तक रिमोट सेंसिंग सर्वे किया जाएगा।
प्रत्येक माह सेटेलाइट की रेंज मुरादाबाद की ओर की जाएगी। सेटेलाइट से यह पता चल जाएगा कि शहर में किन लोगों ने बिल्डिंग निर्माण किया। कहां पर अवैध निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए प्रत्येक क्षेत्र में जेई और अन्य स्टॉफ रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एमडीए कंट्रोल रूम को रिमोट सेंसिंग अप्लीकेशन सेंटर से रूट, स्थान आदि की जानकारी मिल जाएगी।
दूसरे चरण में होगा गजराैला का सर्वे
साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग की रिपोर्ट के आधार पर एमडीए कार्यालय से निर्धारित स्थान पर जांच के लिए जेई को भेजा जाएगा। जेई एप के माध्यम से अपनी रिपोर्ट देंगे। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह सिस्टम पारदर्शी होगा। इससे किसी को आरोप लगाने का माैका नहीं मिलेगा। पहले चरण में मुरादाबाद शहर का सर्वे होगा। इसके बाद दूसरे चरण में गजराैला का सर्वे किया जाएगा।
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पारदर्शिता के लिए इस सिस्टम को अपनाने की इजाजत दी गई है। बोर्ड की बैठक में भी अत्याधुनिक प्रणाली अपनाने पर बल दिया गया था। इस व्यवस्था से सिर्फ जांच के लिए ही अधिकारियों की जरूरत पड़ेगी। - शैलेष कुमार, उपाध्यक्ष, एमडीए