मुरादाबाद। शहर में रविवार को करवाचौथ की धूम रही। दिनभर त्योहार की शुभकामनाओं का दौर चला। सोलह शृंगार कर शाम को महिलाएं जब तैयार हुईं तो उनके चेहरे पर प्रेम, विश्वास और सम्मान की भावनाओं से भरपूर नूर दमक रहा था। विधि-विधान से पूजन करने के बाद सुहागिन महिलाओं ने चांद के दर्शन किए, फिर अपने पति के हाथों पानी पीकर व्रत पूरा किया।
पति-पत्नी के प्रेम का दिन करवाचौथ पर सुहाग की सलामती के लिए महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा। शाम को सजधज कर पूजा की। लाल साड़ी, बालों में गजरे की महक, हाथों में रची सुर्ख लाल मेहंदी महिलाओं की सुंदरता में चार चांद लगा रही थी। कॉलोनियों के अलावा सोसायटियों में भी महिलाओं ने सामूहिक रूप से कथा सुनी। भजन-कीर्तन कर महिलाओं ने बुजुर्गों के पैर छूकर सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर पतियों ने भी उपहार दिए।
गीता ज्ञान मंदिर में पंडित गिरिजा भूषण मिश्रा ने भगवान गणेश और करवाचौथ की कथा सुनाई। सुहागिन महिलाओं ने सामूहिक रूप से कथा सुनी। शाम को महिलाएं मंदिर में एकत्रित हुईं और एक-दूसरे के साथ पूजा की थाली बदली। रात को चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथों पानी पीकर व मिठाई का सेवन कर व्रत पूरा किया। इस दौरान नीलम गगनेजा, सुमन गुंबर, यशोदा मिश्र, मीनाक्षी, अनीता कोहली आदि मौजूद रहीं।
जेल में 31 महिलाओं ने रखा व्रत
मुरादाबाद जेल में भी रविवार को करवाचौथ की धूम रही। यहां पर 31 महिलाओं ने व्रत रखा। इनमें से 13 ऐसी महिलाएं थीं, जिनके पति भी इसी जेल में बंद हैं। चंद्रमा के निकलने के समय इन पतियों की मुलाकात महिला बंदियों से करवाई गई। महिलाओं ने चंद्रमा के दर्शन करने के बाद छलनी से अपने पति का चेहरा देखा और उनके हाथों पानी पीकर व्रत पूरा किया। जेलर विक्रम यादव ने बताया कि अन्य 18 महिलाओं की मुलाकात उनके पतियों से इसलिए नहीं करवाई जा सकी, क्योंकि रविवार को अवकाश था।
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करवाचौथ पर सेल्फी का रहा क्रेज
सोशल मीडिया के दौर में फेसबुक, व्हॉट्सएप, इंस्टाग्राम व अन्य सोशल साइट्स पर अपना फोटो स्टेटस पर लगाने की बेकरारी रहती है। ऐसे में सजने-संवरने और पूजा करने के बाद महिलाओं में भी सेल्फी लेने का जबरदस्त क्रेज रहा। दिनभर एक-दूसरे को खूब चुटकुले और संदेश भेजे गए और रात में पूजा के बाद फोटो अपलोड किए गए।
लाल रंग की थीम पर सजे रेस्टोरेंट
बहुत से दंपतियों ने चंद्रमा का दीदार करने के बाद रेस्टोरेंट जाकर डिनर किया। रेस्टोरेंट संचालकों के अनुसार रविवार को अवकाश का दिन होने की वजह से अपेक्षाकृत अधिक भीड़ थी। यह दिन प्रेम और सौहार्द का है, इसलिए सजावट की थीम भी लाल रंग रखी गई थी। गुब्बारे, झालर और कुशन सुर्ख लाल व सफेद रंग के थे। खुशबू वाली मोमबत्ती की मध्यम रोशनी में लोगों ने डिनर किया। इस दौरान सुरीली और धीमी आवाज में बज रहे संगीत ने खुशियों को दोगुना कर दिया।
बुकिंग के बाद भी करना पड़ा इंतजार
करवाचौथ पर अपने रूप से पतियों को रिझाने के लिए महिलाओं ने कई दिन पहले ही पार्लर की बुकिंग करवा ली थी। रविवार दोपहर से ही महिलाएं सजने के लिए ब्यूटी पार्लर पहुंच गईं, लेकिन वहां पर भीड़ होने की वजह से इंतजार भी करना पड़ा। ब्यूटीशियन का कहना था कि बिना बुकिंग वाली महिलाओं को भी सजाना था। इसके लिए अतिरिक्त स्टॉफ लगाना पड़ा। शाम सात बजे तक महिलाएं सजने के लिए आती रहीं।
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हर साल पहली बार जैसा लगता है करवाचौथ
दीनदयाल नगर निवासी शालिनी मेहरोत्रा ने बताया कि मनु मेहरोत्रा के साथ मेरी शादी वर्ष 1999 में हुई थी। 24 अक्तूबर को मेरी शादी को 25 साल पूरे हो जाएंगे। तीन दिन बाद मेरी शादी की सालगिरह है। इसलिए यह करवाचौथ मेरे लिए बहुत खास है। पूरे उत्साह के साथ मैं यह व्रत रखती हूं। हर साल लाल रंग की ही साड़ी पहनती हूं। मंदिर में पूजा कर पति की लंबी उम्र की प्रार्थना की है। आज भी वैसी ही खुशी महसूस हो रही थी, जैसी मुझे पहली बार व्रत रखते समय हुई थी।
पहले करवाचाैथ पर ससुराल और मायके से मिले उपहार
रामगंगा विहार निवासी विजयलक्ष्मी गौड़ और तनिष गौड़ का यह पहला करवाचौथ था। विजयलक्ष्मी ने बताया कि मैंने निर्जला व्रत रखा। पहला व्रत मायके में रखा जाता है, इसलिए मैं अपनी मम्मी के घर कटघर आ गई। ससुराल से सरगी आई थी। इसमें कपड़े, फल, मेवा, मेकअप का सामान, मठरी, बिछुआ और पायल आई थी। मुझे ससुराल और मायके दोनों जगह से उपहार मिले। मेरी मम्मी व सासू मां ने पायल दी और भैया ने सोने की अंगूठी दी। वहीं पति ने उपहार में डायमंड के ईयररिंग्स दिए। शाम को भाभी और मम्मी के साथ करवाचौथ का पूजन किया। इसके बाद छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद पति का चेहरा देखा और पति के हाथों पानी पीकर व्रत पूरा किया।
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ढेर सारी चॉकलेट देकर मनाई खुशी
बुद्धि विहार निवासी अंकित चौहान और अपूर्वा चौहान भी पहले करवाचौथ को लेकर उत्साहित दिखे। अपूर्वा ने बताया कि मेरे मायके से करवाचौथ का सामान आया था। हमारे यहां सासू मां के लिए बायना, कपड़ा, मेवा, पायल-बिछुआ और ससुर के लिए कपड़े भेजने का रिवाज है। वहां से उपहार आए थे। मैंने निर्जला व्रत रखा था। मुझे चॉकलेट बहुत पसंद हैं। इसलिए मेरे पति ने पानी पिलाने के बाद ढेर सारी चॉकलेट दी थीं। इसके अलावा एक मेरी पसंद की साड़ी भी गिफ्ट की। मैंने अपने पति घड़ी गिफ्ट में दी।
सामूहिक रूप से मनाया करवाचौथ
अखिल भारतीय चित्रांश महासभा महिला इकाई की ओर से पीलीकोठी आवास विकास में सामूहिक रूप से करवाचौथ का त्योहार मनाया गया। विधिवत रूप से पूजा-अर्चना करके करवाचौथ की व्रत कथा सुनी। आरती कर अपने से बड़ी महिलाओं के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। चंद्रमा देखकर मिट्टी के करवा से अर्घ्य दिया और व्रत पूरा किया। इस दौरान आभा जौहरी, अर्चना जौहरी, सिमरन, किरन, पूनम सक्सेना आदि मौजूद रहीं।
वहीं बुद्धि विहार में महिलाओं ने दोपहर में सामूहिक रूप से करवाचौथ के व्रत की कथा सुनी और शाम को चंद्रमा के दर्शन किए। अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत खोला। इस दौरान सरिया यादव, लक्ष्मी यादव, मनीषा राठी, चंद्रकला, एकता जायसवाल आदि मौजूद रहीं।
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सोसायटियों में भी रही करवा चौथ की धूम
वेबग्रीन सोसायटी में हर्षोल्लास से करवाचौथ का त्योहार मनाया गया। घरों में विधि-विधान से पूजा करने के बाद सभी महिलाएं पार्क में एकत्र हुईं। यहां पर सभी ने चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दिया और पति की दीर्घायु की प्रार्थना की। इस दौरान मीनू, पल्लवी अरोड़ा, पूजा कपूर, बबीता खरबंदा, सोनिया खुराना आदि मौजूद रहीं।वहीं गौर ग्रेसियस में महिलाओं ने विधि विधान से मंदिर में पूजन किया। शाम को चंद्रमा के दर्शन किए। इस दौरान मेघना अग्रवाल, यामिनी गोयल, बबीता गोयल, लवली, मनीषा आदि मौजूद रहीं।
कमिश्नर कार्यालय के सामने सेंट्रल कोर्ट टावर थ्री के कम्युनिटी हॉल में सामूहिक रूप से करवाचौथ का त्योहार मनाया गया। महिलाओं ने दोपहर में कथा सुनी और शाम को चांद का दीदार कर खुशी मनाई। इस दौरान सोनाक्षी अग्रवाल, रूपल बंसल, हिना छावड़ा, दीपा वादवा, डॉ. रुचि अग्रवाल, डॉ. कुमकुम मेहरोत्रा आदि मौजूद रहीं।
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रविवार होने से हुई सहूलियत
गौर ग्रेसियस निवासी अश्वनी और शिखा दुबे दोनों ही निजी स्कूलों में शिक्षक हैं। शिखा ने बताया कि इस बार रविवार होने की वजह से बहुत सहूलियत हुई। पूरा दिन दोनों का साथ में बीता। पूजा भी आराम से की। उन्होंने कहा कि व्रत रखने के साथ-साथ रविवार के अवकाश की भी खुशी थी।