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Moradabad News: लक्की की दाल...जो न खाए सो अनलकी

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मुरादाबाद। सुबह के 10 बज चुके हैं। पीलीकोठी के सामने वाली सड़क पर खासी चहल-पहल है। फर्राटा भरती गाड़ियां किसी भी तरह का व्यवधान नहीं चाहतीं, लेकिन चौराहे की एक दुकान के आगे लगी भीड़ उन्हें अपनी गति धीमी करने के लिए मजबूर कर रही है। यह लक्की दाल वाले की दुकान है। दुकान पर बकायदा एक बोर्ड लगा है- पीलीकोठी की सबसे पहली पुरानी दुकान, लक्की दाल वाले।
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शहर में मूंग की दाल के कई ठिकाने हैं, लेकिन लक्की की दाल का स्वाद लोगों की जुबान पर कुछ ज्यादा ही चढ़ा हुआ है। दुकान के संचालक गौरव कश्यप कहते हैं, करीब 82 साल से उनकी पीढि़यां पीढ़ियां इस शहर के लोगों को मूंग की ऐसी दाल खिला रही हैं, जिसका स्वाद एक बार जबान पर चढ़ जाए तो फिर नहीं भूलता। गौरव कहते हैं, मेरे दादा ने 15-16 साल की उम्र में दाल का छोटा-सा ठेला लगाना शुरू किया था। तब इसका कोई नाम नहीं था। इसके बाद ताऊ और पिता ने इस कारोबार को संभाला। अब मैं 15 साल से शहर के लोगों को दाल खिला रहा रहूं।
गौरव का परिवार सुबह चार बजे से दाल बनाना शुरू करता है। धीमी आंच पर पकाई गई इस दाल को बनने में ढाई से तीन घंटे लग जाते हैं। 25 और 35 रुपये में मिलने वाली इस दाल का स्वाद लेने के लिए 200-250 लोग रोज यहां पहुंचते हैं।
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गौरव कहते हैं कि इनके यहां की दाल इसलिए मशहूर है क्योंकि इसे तैयार करने में घर पर हाथ से कूटे मसालों का उपयोग किया जाता है। साथ ही अमूल मक्खन, हींग, हरी चटनी, भुनी मिर्च और मठरी डाली जाती है। गौरव ने बताया कि शादी व पार्टी में मुरादाबाद से तो ऑर्डर आते ही हैं, वह गुजरात तक स्टॉल लगा चुके हैं। आजकल लोग सेहत को लेकर खासे सचेत हो गए हैं। इस लिहाज से शादी-ब्याह में सबसे ज्यादा भीड़ दाल के स्टॉल पर ही होती है। दाल के जायके के बारे में पूछने पर इनकी दुकान पर बाकायदा दोने की तली चाट रहीं हिंदू कॉलेज की छात्रा शर्मिष्ठा चहकते हुए कहती हैं- देखिए, लक्की की दाल का तो ऐसा कि जो न खाए सो अनलकी!
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