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Moradabad News: गंदे पानी, संक्रमण से ज्यादा मोटापे व शुगर से खराब हो रहा लिवर

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मुरादाबाद। आम तौर पर आपने गंदे पानी, अल्कोहल व संक्रमण के कारण लिवर की बीमारी होते सुना होगा। अब बदलती दिनचर्या व खराब खानपान के कारण मोटापा और डायबिटीज लिवर की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। मोटापे, शुगर व हाई कॉलेस्ट्रॉल के कारण फैटी लिवर व सिरोसिस (घाव) के मामले बढ़ रहे हैं।
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पहले हेपेटाइटिस व लंबे समय तक शराब का सेवन सिरोसिस (घाव) का कारण माना जाता था, लेकिन अब ऐसे मरीजों में सिरोसिस देखा गया जिन्होंने कभी शराब नहीं पी। डॉक्टरों का मानना है कि सिरोसिस से होने वाले नुकसान को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। दवाओं से इस पर नियंत्रण जरूर रहता है। मुरादाबाद के पेट रोग विशेषज्ञ (गेस्ट्रो) डॉ. राजीव गुप्ता का कहना है कि जंक फूड से परहेज, शुगर व कॉलेस्ट्रॉल नियंत्रण, बॉडी मास इंडेक्स प्रबंधन लिवर को सुरक्षित रखने के उपाय हैं। उन्होंने बताया कि आधुनिक दिनचर्या व खानपान बच्चों में हेपेटाइटिस-ए, पीलीया तो बड़ों में हेपेटाइटिस-सी व सिरोसिस के मामले बढ़े हैं।

लिवर के लिए खतरनाक हैं ये बीमारियां
बीमारी कारण
हेपेटाइटिस-बी वायरस संक्रमण
हेपेटाइटिस-सी वायरस संक्रमण
हेपेटाइटिस-ए व ई गंदा पानी व अल्कोहल
सिरोसिस जंक फूड, शुगर, मोटापा, अल्कोहल, हाई कॉलेस्ट्रॉल

चार साल में हेपेटाइटिस-सी के 25 हजार मरीज
फिजिशियन डॉ. रामकिशोर के मुताबिक हेपेटाइटिस लिवर की बीमारी है, जिसके कई स्वरूप ए,बी,सी, ई आदि हैं। हेपेटाइटिस-बी का वायरस पांच साल में लिवर को पूरी तरह खराब कर देता है। इस बीमारी का पता जल्दी चल जाता है, भारत में इसके बहुत कम मरीज हैं। जबकि हेपेटाइटिस-सी ज्यादा खतरनाक है। इसमें बीमारी का जल्दी पता नहीं चलता और लक्षण भी महसूस नहीं होते। इस वायरस को लिवर खराब करने में 18 साल लगते हैं। जिला अस्पताल में पिछले चार साल में 25 हजार मरीजों ने हेपेटाइटिस-सी का उपचार लिया है।
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लिवर की बीमारियों के लक्षण
- भूख कम लगना या न लगना
- लगातार वजन कम होना
- उल्टी, चक्कर या कमजोरी महसूस होना
- पैरों व पेट में दर्द रहना
- गहरे रंग का पेशाब, पेट में गैस

लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय
- अल्कोहल का सेवन कम से कम करें
- मैदा, तैलीय व मसालेदार चीजें कम खाएं
- वेजीटेबल सूप व हरी सब्जियों का सेवन करें
- जूस से ज्यादा फलों का सेवन करें
- रोजाना 30 मिनट जरूर टहलें
- भूख से कम खाना खाएं

इस तरह उपलब्ध है इलाज
हेपेटाइटिस-बी की वैक्सीन सरकारी कार्यक्रम का हिस्सा है। हेपेटाइटिस-सी का दवा भी सरकारी अस्पतालों में मिलती है। जबकि निजी खरीद पर तीन माह की दवा करीब 45 हजार रुपये की है। डॉक्टरों के मुताबिक 10 साल की उम्र तक 75 प्रतिशत व 16 साल की उम्र तक 90 प्रतिशत लोग हेपेटाइटिस-ए से बीमार हो चुके होते हैं। यह संक्रमण ज्यादा बढ़ने पर बच्चों को पीलीया हो जाता है। इसके अलावा एचसीवी, एचबीएसएजी, फैटी लिवर, लिपिड प्रोफाइल, फाइब्रो स्केन आदि जांचों से लिवर की स्थिति का पता लगाया जाता है।

- लिवर की बीमारियों का बड़ा कारण हमारा खानपान है। इसके कारण ही बच्चों में भी मोटापा व डायबिटीज जैसी बीमारियां हो रही हैं, जोकि लिवर को खराब कर रही हैं। रोज 30 मिनट व्यायाम ही एकमात्र उपाय है। जंक फूड सप्ताह में सिर्फ एक दिन ही ठीक है। पेट भरकर कभी जंक फूड न खाएं। - डॉ. राजीव गुप्ता, गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट
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