पाकबड़ा। शहर के आसपास कई तेंदुए देखे जाने से दहशत बढ़ गई है। तेंदुए लगातार पशुओं पर हमला कर रहे हैं। बीते एक सप्ताह में तेंदुए कुत्ता, गाय और नीलगाय को अपना निवाला बना चुके हैं। लोगों का कहना है कि आधा दर्जन से ज्यादा तेंदुए पाकबड़ा और नया मुरादाबाद क्षेत्र में घूम रहे हैं। हालांकि, वन विभाग इसकी पुष्टि नहीं कर रहा है।
बीते कुछ सालों से शहर की सीमा के पास तेंदुओं का आना बढ़ गया है। हालांकि, इससे पहले तेंदुए भटककर आते थे और कुछ दिन वापस जंगल लाैट जाते थे, लेकिन इस बार तेंदुए कस्बों के साथ शहरी आबादी की ओर बढ़ने लगे हैं। इस साल तेंदुए लगातार शहरी और कस्बाई आबादी में घुसकर हमला कर रहे हैं। तेंदुए नया मुरादाबाद के साथ ही पाकबड़ा के आसपास आधा दर्जन गांवों में तेंदुए दिखाई दे रहे हैं। अब तक कई जानवरों को भी तेंदुए अपना निवाला बना चुके हैं।
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नया मुरादाबाद और पाकबड़ा में दहशत ज्यादा
नया मुरादाबाद और पाकबड़ा क्षेत्र में तेंदुओं के कारण लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। क्षेत्र के गिदौड़ा, गुरैठा, हकीमपुर, सिंकदरपुर, मौढ़ा तेहिया, ज्ञानपुर, बहलोलपुर समेत दर्जनों गांवों में किसान भयभीत हैं। लोगों में दहशत इस कदर है कि नया मुरादाबाद में माॅर्निंग वाॅक करने वालों की संख्या कम हो गई है। नया मुरादाबाद के सभी सेक्टरों में नीलगाय झुंड में रहती थीं, लेकिन तेंदुओं के दिखाई देने के बाद से अब नीलगाय गायब हो गई हैं।
नया मुरादाबाद के सेक्टर 13 में रहने वाले विवेक कौशिक ने बताया की तेंदुए की दहशत है। बच्चे छोटे हैं, उनकी चिंता लगी रहती है। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग को ठोस उपाय करने चाहिए। वहीं सेक्टर पांच निवासी वाहिद हुसैन बताया की तेंदुए के चलते सुबह का टहलना बंद हो गया है। पाकबड़ा के पाट वाली मिलक निवासी निपेंद्र सिंह ने बताया की उनके घर के पास ही तेंदुए ने एक गाय को मार दिया था। इसके बाद लोगों ने खेतों की ओर जाना बंद कर दिया है। गिदौड़ा गांव निवासी अनंत शर्मा ने बताया की उनके गांव में तेंदुए का आंतक है। तेंदुए खेतों में गायों को निवाला बना रहे हैं। वन विभाग तेंदुओं को पकड़ने के लिए सक्रिय नजर नहीं आ रहा है।
जंगल कम होते जा रहे हैं। तेंदुए की संख्या भी बढ़ गई है। शेर से बचने के लिए जंगल छोड़कर तेंदुए खेतों में आ रहे हैं। यहां पर तेंदुए को आसानी से शिकार मिल जाता है। जहां तेंदुआ देखा जा रहा है, वहां पर वन विभाग की ओर से पिंजरा लगवाया जा रहा है। - रमेश चंद्र, क्षेत्रीय वन संरक्षण अधिकारी