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डिग्री लेने के बाद बनी रहे मुस्कान, यही आर्ट ऑफ लिविंग : श्रीश्री

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मुरादाबाद। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोध के मुताबिक एक बच्चा दिन में 40 बार हंसता है। कॉलेज तक का सफर करने के बाद वह 24 घंटे में महज 17 बार हंसता है। डिग्री लेने के बाद नौकरी की चिंता में यह मुस्कान कहीं खो जाती है। डिग्री लेने के बाद भी मुस्कान जीवित रहे, यही आर्ट ऑफ लिविंग है। यह बात आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने टीएमयू में आयोजित विशेष दीक्षांत समारोह में कही।
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टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन, जीवीसी मनीष जैन व ईडी अक्षत जैन ने श्रीश्री को डीलिट की मानद उपाधि से अलंकृत किया। उनके लिए ही सोमवार को विशेष दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया। आध्यात्मिक गुरु ने युवाओं व टीएमयू की फैकल्टीज को संबोधित करते हुए रोजगारपरक शिक्षा की वकालत की। उन्होंने कहा कि जीवन में मुस्कान तभी बची रहेगी जब हमारी शिक्षा रोजगारपरक होगी। मुझे खुशी है कि टीएमयू इस दिशा में लगातार काम कर रहा है। दुनिया में अगला युद्ध पानी को लेकर होगा, विश्वविद्यालय में जल संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसीलिए विवि जल संरक्षण कैंपेन की अलख पूरे देश में जगाए।
समारोह के दौरान टीएमयू के कुलाधिपति सुरेश जैन ने सुदर्शन क्रिया के महत्वपूर्ण अंग सोहम का छात्रों से लयबद्ध उच्चारण करवाया। सम्मान में जीवीसी मनीष जैन ने श्रीश्री को शाल मेंट की। एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अक्षत जैन ने रजत श्रीफल भेंट किया। उन्हें कॉलेज ऑफ फाइन आर्टस की ओर से बनाया गया तैलीय चित्र भी उपहार स्वरूप दिया गया।
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एक ही दिन में मुझे बना लिया एल्युमिनाई
श्रीश्री रविशंकर ने हंसते हुए कहा कि आप सब ने एक ही दिन में मुझे अपना एल्युमिनाई बना लिया है। छात्रों से कहा कि अब आप और हम यहीं के हो गए हैं। इस मौके पर टीएमयू की फर्स्ट लेडी वीना जैन, वीसी प्रो. वीके जैन, डायरेक्टर एडमिन अभिषेक कपूर, रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन के अलावा निदेशक, प्राचार्य आदि की मौजूदगी रही। विशेष दीक्षांत समारोह में एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, मेयर विनोद अग्रवाल, अनिल जैन आदि भी मौजूद रहे। राष्ट्रगान के साथ विशेष दीक्षांत समारोह का समापन हुआ।
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युवाओं को शरारती होना चाहिए, शरारत कष्टकारी न हो
श्रीश्री रविशंकर ने संबोधन का शंखनाद मंत्रोच्चारण से किया। उन्होंने कहा कि मैंने यहां आकर अनुभव किया, यहां सुंदर व्यक्तित्व का निर्माण हो रहा है। यही शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य भी है। उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि आपमें से कौन शरारती है और कौन शरारती नहीं है। फिर कहा कि युवाओं को शरारती होना भी चाहिए, लेकिन शरारत से किसी को कष्ट न पहुंचे। संस्कृति और संस्कार पर कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि मैं पर्यूषण पर्व पर आपके बीच में हूं। मुस्कान को जीवन का अभिन्न अंग बताते हुए कहा, हमेशा मुस्कुराते रहिए।
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चार घंटे तक योग व ध्यानमय रहा टीएमयू का वातावरण
आद्यात्मिक गुरु के आने से पहले आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े संगीतकार साकेत कक्कड़ व टीम ने तमाम भक्तिमय, आध्यात्ममय और योगमय गीतों की बारी-बारी से प्रस्तुति दी। बीच-बीच में योग प्रशिक्षक ऋतु नारंग ने कई स्टेप बताए। इसके बाद भजनों पर आर्ट ऑफ लिविंग के स्वयंसेवकों ने जमकर भक्ति नृत्य किया। समारोह के दौरान श्रीश्री के जीवनवृत को भी दिखाया गया। कार्यक्रम में प्रो. एनके सिंह, प्रो. प्रीथपाल सिंह मटरेजा, प्रो. एसके जैन, प्रो. एमपी, प्रो. आरके द्विवेदी, डॉ. ज्योति पुरी, मनोज जैन आदि मौजूद रहे।
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