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Moradabad News: आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति मामले में चार स्कूलों की जांच शुरू

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मुरादाबाद। आरटीई के तहत मिलने वाले शुल्क प्रतिपूर्ति में अनियमितता के मामले में चार स्कूलों में जांच शुरू हो चुकी है। इसमें तीन स्कूलों में छात्र प्रतिपूर्ति शुल्क भेजा जा चुका है, जबकि एक स्कूल में भेजा जाना है। इन्हीं स्कूलों में छात्र प्रतिपूर्ति शुल्क भेजने से पहले जिलाधिकारी ने भी सत्यापन करवाया था। बीएसए का कहना है कि जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत मुरादाबाद जनपद में छात्र प्रतिपूर्ति शुल्क में करीब नौ करोड़ रुपये का बजट आया था और लगभग ज्यादातर विद्यालयों में भेजा जा चुका है। इसी के तहत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बुद्धप्रिय सिंह ने भगतपुर टांडा के एनकेएस पब्लिक स्कूल एजूकेशन इंग्लिश अकेडमी जाहिदपुर (करीब नौ लाख 52 हजार रुपये), एनकेएस पब्लिक जूनियर हाईस्कूल जाहिदपुर (करीब 13 लाख 89 हजार रुपये), रामवती मेमोरियल प्राथमिक विद्यालय (लगभग छह लाख 96 हजार रुपये), भगवान दास इंटर कॉलेज मझरा देवीपुरा (करीब 11 लाख 17 हजार रुपये) की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने तीन सदस्यीय एक जांच समिति गठित की है, जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र मनोज बोस, खंड शिक्षा अधिकारी नगर क्षेत्र सुरेंद्र सिंह, खंड शिक्षा अधिकारी छजलैट जगदीश कुमार को शामिल किया है। इस समिति को चारों विद्यालयों की शुल्क प्रतिपूर्ति संबंधी अभिलेखों की स्थलीय जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

डीसी को दिया नोटिस
इसी मामले में जिला समन्वयक (डीसी) अमित कुमार सिंह को नोटिस जारी किया गया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बुद्धप्रिय सिंह का कहना है कि अमित कुमार सिंह से आदेश बनाने को कहा गया था, लेकिन उन्होंने आदेश नहीं बनाया था। इसी वजह से उन्हें नोटिस जारी किया गया है।
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जिलाधिकारी ने करवाया था सत्यापन
आरटीई के तहत शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में पांच लाख रुपये से अधिक शुल्क की मांग करने वाले करीब 39 स्कूलों के खिलाफ वित्तीय अनियमितता की आशंका के तहत जिलाधिकारी ने फरवरी माह में सत्यापन करवाया था। जांच प्रक्रिया को ब्लॉक स्तर पर बांटा गया था। इसमें विद्यालयों के सत्यापन के लिए एआरपी, बीईओ के अलावा जिला स्तरीय अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसमें उन्हें विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए विद्यालय में नामांकित आरटीई के तहत पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों, अद्यतन अवशेष फीस प्रतिपूर्ति की धनराशि एवं विद्यालय के बैंक खाते का सत्यापन करना था। जांच के दायरे में आए 39 विद्यालयों में इन स्कूलों का नाम भी शामिल था।


तीन स्कूलों में शुल्क प्रतिपूर्ति का बजट गया है। एक स्कूल में नहीं गया है। सत्यापन की रिपोर्ट अस्पष्ट थी। उस रिपोर्ट में प्रबंधक ने अध्ययनरत विद्यार्थियों का विवरण दिया था। जो समिति जांच के लिए गई थी, उनको विवरण के अनुरूप विद्यार्थी स्कूल में नहीं मिले थे। अधिकारियों ने वही रिपोर्ट जमा की थी। बजट वित्तीय वर्ष के आखिरी समय पर आया था। स्कूलों को बजट देना जरूरी था। यदि विद्यार्थी अनुरूप नहीं मिलेंगे, तो दिया गया बजट वापस लिया जाएगा।
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बुद्धप्रिय सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी
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