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Moradabad News: अभिभावकों की नादानी... बच्चों की जान पर बनी

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मुरादाबाद। अभिभावकों की गलती से बच्चों की जान पर बन आई है। मुरादाबाद देहात क्षेत्र के कई परिवारों ने बच्चों का टीकाकरण पूरा नहीं कराया। अब इसके गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। दो माह में 15 से ज्यादा डिप्थीरिया के मरीज मिल चुके हैं। इनमें दो बच्चों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के लिए यह आंकड़ा गले की हड्डी बना हुआ है।
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हालांकि, विभाग मरीजों का आंकड़ा छिपाने में लगा है। मुरादाबाद के मरीजों को संभल जिले का बताया जा रहा है। अब तक मिले मरीजों में एक शहरी क्षेत्र व अन्य कुंदरकी व बिलारी के हैं। दो मरीज संभल जिले के थे, जिन्हें मुरादाबाद में डिप्थीरिया एंटीटॉक्सिन लगाया गया। जिन बच्चों की मौत हुई उनमें से एक बिलारी के सादिकपुर व दूसरा कुंदरकी का रहने वाला था।
वर्तमान में भी जिला अस्पताल में डिप्थीरिया पीड़ित दो बच्चे भर्ती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में बच्चों का टीकाकरण निशुल्क किया जाता है, जिसका खर्च निजी अस्पतालों में लगभग 50 हजार रुपये है। इसके बावजूद कई लोग बच्चों का टीकाकरण नहीं करा रहे हैं। उनमें तमाम तरह की भ्रांतियां हैं। छह माह पहले बच्चों के टीकाकरण में मुरादाबाद का स्थान प्रदेश में बेहद पिछड़ा था। अब जाकर स्थिति में सुधार हुआ है। अब डिप्थीरिया के लगातार आ रहे मामलों ने चिंता खड़ी कर दी है।
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कोविड में छूटी डोज का भी हो सकता है प्रभाव
कोरोना काल में कई बच्चों का टीकाकरण नहीं हो पाया था। कई विशेषज्ञों का मानना है कि डिप्थीरिया के मरीज निकलने का यह भी कारण हो सकता है। जो बच्चे डिप्थीरिया से पीड़ित मिले हैं, उनमें सात व आठ साल के भी हैं। कोरोना काल में उनकी उम्र पांच साल रही होगी। उस समय डिप्थीरिया की बूस्टर डोज न लगने के कारण भी यह स्थित हो सकती है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि टीकाकरण से छूटे बच्चों को बाद में अभियान चलाकर डोज दे दी गई थी।


क्या है डिप्थीरिया

यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन है, जो गले और नाक की भीतरी परत को नुकसान पहुंचाता है। अगर यह इंफेक्शन ज्यादा फैल गया है और समय पर इलाज नहीं मिला तो इससे खतरनाक टॉक्सिन्स निकलने लगते हैं, जो किडनी, लिवर और नर्वस सिस्टम को भी डैमेज कर सकते हैं। पांच साल से कम उम्र के बच्चे और गर्भवती महिलाओं को इंफेक्शन का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए समय पर टीकाकरण जरूर करा लेना चाहिए। इसका टीका दो महीने, चार महीने, छह महीने, 15 से 18 महीने, चार से छह साल की उम्र के बीच पांच बार दिया जाता है। इसका असर सिर्फ 10 साल तक ही रहता है। इसलिए 12 साल की उम्र के आसपास फिर से टीका लगवाने की जरूरत पड़ती है।



बच्चों का टीकाकरण चार्ट
जन्म के समय - बीसीजी
छह हफ्ते में - पेंटावेलेंट-1
नौ हफ्ते बाद - पेंटावेलेंट-2
14 हफ्ते में - पेंटावेलेंट-3
छह माह पर - इन्फ्लूएंजा ओपीवी
9-12 माह पर - एमएमआर-1
4-6 साल पर - डीटीपी बी-2

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दो माह में लगभग 15 बच्चे डिप्थीरिया के भर्ती हो गए हैं। सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बच्चों का टीकाकरण निशुल्क किया जाता है। डिप्थीरिया (गलघोंटू), काली खांसी, खसरा आदि बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण जरूर कराना चाहिए।
- डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्साधीक्षक जिला अस्पताल
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जिन परिवारों ने बच्चों का टीकाकरण नहीं कराया, बाद में बीमारी का पता चलने पर उन्हें डीएटी वैक्सीन लगाई जाती है। कई गांवों में व स्कूलों में अभियान चलाकर बच्चों का टीकाकरण किया गया है।
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- डॉ. संजीव बेलवाल, डिप्टी सीएमओ
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