छजलैट के पंद्रह साल पुराने मामले में दोषी पाए गए अब्दुल्ला आजम सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में बताया कि घटना के वक्त वह नाबालिग था। इसलिए उसके मुकदमे की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड द्वारा की जानी चाहिए थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए जनपद न्यायाधीश मुरादाबाद को आदेशित किया था कि वह इस मामले की सुनवाई कर अब्दुल्ला आजम के नाबालिग होने या न होने का निर्णय करें। जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव अग्रवाल ने बताया कि जनपद न्यायाधीश डाॅ. अजय कुमार ने इस मामले में दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर दिया था, लेकिन अब्दुल्ला आजम को नोटिस तामील न होने की वजह से सुनवाई नहीं हो पा रही थी। बृहस्पतिवार को अदालत ने अब्दुल्ला आजम के पूर्व वकील जिनके द्वारा अब्दुल्ला आजम ने अपील दाखिल की थी। उन्हें भी नोटिस जारी किया गया। उन्होंने बताया कि अपील एडीजे दो पुनीत गुप्ता की अदालत में की गई थी। साथ ही बताया कि अब्दुल्ला आजम को रामपुर जिला न्यायालय से दोष सिद्ध होने के बाद उन्हें हरदोई जेल भेज दिया गया था। जनपद न्यायाधीश ने हरदोई जेल में सात साल की सजा काट रहे अब्दुल्ला आजम को भी नोटिस जारी किया है।
ये था मामला
सड़क जाम करने और आम जनता को उकसा कर सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के मामले में मुरादाबाद की एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने 13 फरवरी को आजम खां और अब्दुल्ला आजम के खिलाफ दो-दो साल की सजा और प्रत्येक पर 3-3 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। इस मामले में अब्दुल्ला आजम ने जनपद न्यायालय में 21 फरवरी को अपील की थी।अब्दुल्ला आजम ने अपनी अपील में कहा था कि वह घटना के वक्त नाबालिग थे। इस कारण से उनके मुकदमे की सुनवाई का अधिकार किशोर न्याय बोर्ड को था न कि किसी अन्य अदालत को। इसी बात को लेकर अब्दुल्ला आजम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।