मुरादाबाद। शिव शिक्त मंदिर में चल रही पांच दिवसीय राम कथा के अंतिम दिन पंडित बृजेश पाठक रामयाणी ने अमृत वर्षा करते हुए कहा कि जो लोग सेवा कार्य से जुड़े हुए हैं। उनके लिए हनुमान से बड़ा कोई आदर्श नहीं हो सकता। सेवा कार्य निर्भय होकर मन से किस प्रकार किया जाए, यह उनसे सीखा जा सकता है। वे श्रीराम की सेवा के लिए हर समय तत्पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा के साथ भक्ति के जुड़ जाने से वह सेवा पूजा बन जाती है। भगवान की भक्ति के लिए कोई उम्र सीमा नहीं होती। कुछ लोग इसे टालते रहते हैं, कि बच्चे बड़े हो जाएंगे तब भक्ति में लगेंगे, फिर जब बच्चे बड़े हो जाते हैं, तब कहते हैं कि जब बच्चों की शादी हो जाएगी तब भगवान की भक्ति में लगेंगे। इस प्रकार जीवन का अंतिम पड़ाव आ जाता है। लेकिन भक्ति नहीं हो पाती। इसलिए जब भी समय मिले जरूरी नहीं कि घंटों मंदिर में बैठे। समय मिलने पर भगवान के नाम का जाप कर लेना चाहिए। अपने बच्चों को तीर्थ स्थल पर जरूर लेकर जाना चाहिए। इससे वे संस्कृति से जुड़ सके। इस दौरान गोरखनाथ प्रसाद, निमित जासयवाल, राधेमोहन शर्मा, महेंद्र जसूजा, पंडित हेमंत भट्ट, बह्मऔतार गुप्ता, ज्ञानचंद्र गुप्ता, सुनील शर्मा, उमेश चंद्र गुप्ता मौजूद रहे। संवाद