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Moradabad News: दोबारा परीक्षा करवाए सरकार, तभी मिलेगा इंसाफ

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मुरादाबाद। नीट में जिस तरह से धांधली की परतें खुल रही हैं, उससे हमें अब एनटीए पर भरोसा नहीं रह गया है। हमारा भविष्य बचाने के लिए अब सिर्फ एक ही रास्ता है कि सरकार दोबारा परीक्षा करवाए। यह कहना है नीट देने वाले अभ्यर्थियों का।
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अमर उजाला कार्यालय में मंगलवार को आयोजित ''''''''संवाद'''''''' में अभ्यर्थियों ने कहा कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार परीक्षा में 14 फीसदी अभ्यर्थी बढ़े हैं, लेकिन परिणाम में जो अंक प्राप्त हुए हैं, उनके आधार पर पिछले वर्ष के मुकाबले उनकी रैंक चार से पांच गुना अधिक आई है। यह सब एनटीए की खामियों की वजह से हो रहा है। एनटीए हर रोज खबरों में अलग-अलग तथ्य सामने ला रहा है। बाहर पेपर आउट कराने के साथ एनटीए के अंदर की संलिप्तता भी गड़बड़ी की जिम्मेदार है। ग्रेस मार्क्स को परीक्षा देरी से शुरू होने की वजह बताया जा रहा है। लेकिन एक केंद्र की प्रिंसिपल ने अपने यहां देरी से परीक्षा शुरू होने की बात से इन्कार कर दिया है। 1563 अभ्यर्थियों के ग्रेस अंक रद्द किए गए हैं, जबकि हो सकता है कि ग्रेस अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या बहुत ज्यादा हो। परीक्षा का परिणाम 14 जून को आना था, लेकिन एनटीए ने चार जून को एक दिन में आंसर की और परिणाम जारी कर दिया। इसलिए सरकार या सुप्रीम कोर्ट को दोबारा परीक्षा करवाने का निर्णय लेना होगा, ताकि जिन अभ्यर्थियों ने कड़ी मेहनत और पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी है, उनका भविष्य बिगड़ने से बच सके।


चले थे डॉक्टर बनने, बन गए अवसाद के मरीज
अभ्यर्थियों ने कहा कि पांच मई को उन्होंने नीट डॉक्टर बनने के लिए दिया था। चार जून को आए परिणाम में गड़बड़ी की वजह से वह अवसाद का शिकार हो रहे हैं। विद्यार्थियों ने कहा कि मतदान सभी करते हैं, लेकिन सरकार उसी की बनती है, जिसका बहुमत होता है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने ईमानदारी से परीक्षा दी है तो फिर उनकी मांग पर यह परीक्षा रद्द क्यों नहीं की जा रही है।
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इन्होंने भी रखी अपनी बात
उन्नति वाष्र्णेय, मिमांशा राजपूत, स्तुति अग्रवाल, महिमानंद गोला, अर्जुन, निष्ठा, यमन राणा, अरबाज खान, युवराज ने भी नीट परिणाम में गड़बड़ियों पर नाराजगी जाहिर की और दोबारा परीक्षा करवाने की मांग की।

यह रहे मौजूद
रहीश अहमद, यासिर अली, एम सिंह, अमन, अनुराग।


- मेरे 620 अंक हैं और 58 हजार रैंक आई है। पिछले साल 18 हजार के आसपास रैंक थी। ग्रेस अंकों वाले 1563 अभ्यर्थियों में वह अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिनके ग्रेस अंक पाने के बाद भी माइनस में अंक हैं। यानी दोबारा परीक्षा देने वाले सात सौ अभ्यर्थी ही पहले पास थे। इसलिए दोबारा परीक्षा नहीं हुई तो हमारी रैंक अभी भी सुधरेगी नहीं। - मयंक सिरोही, अभ्यर्थी

- मेरे 590 अंक हैं। 92 हजार रैंक आई है। एनटीए ने पंजीकरण का दोबारा मौका दिया, जिसमें 24 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। हो सकता है कि नकल गिरोह ने इन अभ्यर्थियों का आवेदन करवाया हो। इसके अलावा परिणाम के बाद काउंसिलिंग करीब एक महीने बाद शुरू होती है, लेकिन इस बार 48 घंटे में ही करा दी गई थी। इसलिए दोबारा परीक्षा होना बहुत जरूरी है। -अनुभव शर्मा, अभ्यर्थी

मेरे 642 अंक आए हैं और रैंक 36 हजार है। पिछली बार इतने नंबर पर रैंक नौ हजार थी। इस बार के परिणाम में ऐसे अभ्यर्थी 690 अंक लाए हैं, जो गत तीन वर्षों से फेल हो रहे थे। एक अनुमान के मुताबिक करीब 60 हजार अभ्यर्थी नकल गिरोह ने इस परीक्षा में बैठाए हैं। नकल के सभी सबूत मौजूद हैं तो फिर सरकार दोबारा परीक्षा करवाने में देरी क्यों कर रही है। -वसु चौहान, अभ्यर्थी


मेरे 414 अंक आए हैं। एनटीए के तथ्य हर कदम पर झूठे साबित हो रहे हैं। पहले दो केंद्रों पर नकल की बात स्वीकारी गई, लेकिन अब 11 केंद्रों पर सीबीआई जांच कर रही है। दोबारा परीक्षा करवाने में सरकार को देरी नहीं करनी चाहिए। - अतिशय जैन, अभ्यर्थी

मेरे 610 अंक आए हैं और डेढ़ लाख के आसपास रैंक है। इस रैंक के आधार पर बीडीएस का अच्छा कॉलेज भी मिलना मुश्किल है। जब कोई नियम ही नहीं था तो फिर एनटीए ने ग्रेस अंक क्यों दिए। कुछ परिणाम में कई अभ्यर्थियों के नाम का पहला विकल्प भरा है और दूसरा विकल्प खाली है, जबकि दोनों को भरना अनिवार्य था। यह भी धांधली की वजह से ही है। - भव्या, अभ्यर्थी

मेरी 32 हजार रैंक आई है, जो सात हजार के आसपास होनी चाहिए थी। इस रैंक में मुझे अच्छा कॉलेज नहीं मिलेगा। सरकार कह रही है कि कुछ केंद्रों से पेपर आउट हुआ है, लेकिन सोशल मीडिया पर पेपर वायरल हो गया था। इसलिए यह परीक्षा दोबारा होनी चाहिए। - श्रेष्ठ गुप्ता, अभ्यर्थी

मेरी रैंक 16892 आई है। यह पांच हजार के आसपास होनी चाहिए थी। इस बार यदि परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों की संख्या ज्यादा थी तो रैंक एक हजार बढ़ जाती, लेकिन नकल की वजह से रैंक बहुत ज्यादा प्रभवित हुई है। इसलिए दोबारा परीक्षा हो और दो माह का समय तैयारी के लिए मिलना चाहिए। -नैंसी प्रजापति, अभ्यर्थी


दोबारा परीक्षा के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दें : विवेक ठाकुर
शिक्षाविद् विवेक ठाकुर ने कहा कि सात सौ अंक पर पिछली बार 220 रैंक थी। इस बार ढ़ाई हजार रैंक हो गई है। एनटीए की संवेदनहीन व्यवस्था थी। हेल्पलाइन नंबर और ईमेल पर कोई जवाब नहीं मिलता था। एनटीए वर्षों से सरकार को बेवकूफ बना रहा है। नीट गड़बड़ी मामले में एनटीए के कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा 10 से 15 लाख रुपये लेकर नकल माफियाओं को विकल्प दिया कि जो उत्तर विद्यार्थी को आता है, सिर्फ उसे ही भरना है। शेष को खाली छोड़ देना है। इन खाली विकल्पों को बाद में नकल माफियाओं ने खुद भरा है। नकल के सभी सबूत मिल चुके हैं। जिस तरह से विद्यार्थियों ने आवाज उठाई है, उससे सरकार पर दबाव बढ़ा है। यह मुद्दा सरकार की प्राथमिकता में आ गया है। शीघ्र ही बड़े और सकारात्मक बदलाव होंगे। दोबारा नकलविहीन परीक्षा होगी तो उसमें भले ही अंक कम आएंगे, लेकिन रैंक का स्तर सुधरेगा। इसलिए अभ्यर्थियों को अभी से दोबारा परीक्षा की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान नीट जैसी परीक्षाएं लगातार होती हैं। दोबारा परीक्षा का तनाव नहीं लेना चाहिए। एक चिकित्सक मरीज की अंतिम सांस तक उसके जीवन को बचाने के प्रयास करता है। ऐसे में अभ्यर्थियों को भी अपने अधिकार के लिए लगातार संघर्ष करना चाहिए। चिकित्सक बनने का सफर बहुत चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में अभ्यर्थियों को भी इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए।
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