गंगा दशहरा हस्त नक्षत्र, सिद्धि योग तथा गुरु बुध योग, दिन मंगलवार को पड़ने के कारण बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति में गंगा दशहरा की पूजा और स्नान-दान का कई गुना फल देगी, लेकिन श्रद्धालु स्नान कहां करेंगे क्योंकि गांगन नदी तो कचरे से पटी पड़ी है। नहाना तो दूर इसका पानी आचमन लायक भी नहीं बचा है।
धार्मिक कथा के अनुसार इस दिन राजा भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर, मां गंगा इस दिन भागीरथ के पूर्वजों की शापित आत्माओं को शुद्ध करने के लिए पृथ्वी पर उतरीं थीं। पृथ्वी पर उतरने के बाद, स्वर्ग की पवित्रता उनके साथ आई। गंगा दशहरा उस दिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। आमतौर पर त्योहार निर्जला एकादशी से एक दिन पहले मनाया जाता हैं। 30 मई को गंगा दशहरा वाले दिन रवि और सिद्धि योग बन रहा है। इसके अलावा इसी दिन शुक्र ग्रह कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र के गोचर से इस दिन धन योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषिकेश शुक्ल का कहना है कि गंगा दशहरा मंगलवार को है। दशमी तिथि 30 मई को दोपहर दो बजकर 48 बजे मिनट तक है। श्री गंगा दशहरा का पूजन 30 मई को सूर्योदय काल प्रातः काल से दोपहर 2:30 तक स्नान ध्यान एवं पूजन किया जाएगा।
गंगा दशहरा पर गांगन और रामगंगा नदी श्रद्धालु स्नान करते हैं। मेला लगता है, लेकिन इस बार गांगन नदी जलविहीन हो चुकी है। गंदगी से अटी पड़ी है। तो वहीं रामगंगा का पानी भी ऐसा नहीं है कि उसमें स्नान किया जा सके। लोगों का कहना है कि प्रशासन को गंगा दशहरा पर दोनों नदियों में बैराज से पानी छुड़वाना चाहिए था।
गंगा दशहरा का महत्व
पंडित नारायण शास्त्री के अनुसार दशहरा दस शुभ वैदिक गणनाओं के लिए मनाया जाता हैं जो विचारों, भाषण और कार्यों से जुड़े दस पापों को धोने की गंगा की क्षमता को दर्शाता हैं। दस वैदिक गणनाओं में ज्येष्ठ माह, शुक्ल पक्ष, दसवां दिन गुरुवार, हस्त नक्षत्र, सिद्ध योग, गर आनंद योग और कन्या राशि में चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य शामिल हैं। कीमती सामान खरीदने, नए वाहन खरीदने या नए घर में प्रवेश करने के लिए दिन अनुकूल माना जाता हैं। गंगा के जल में खड़े होकर जो भक्त इस दिन गंगा स्तोत्र का पाठ करते हैं, उन्हें सभी पापों से मुक्ति पाते हैं।
गंगा दशहरा पर पूजा विधि
सभी भक्त गंगा नदी के तट पर श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं। भक्त अपने पूर्वजों के लिए पितृ पूजा करते हैं और पवित्र डुबकी लगाकर गंगा की पूजा करते हैं। देवी गंगा की पूजा करते समय सभी पदार्थ दस की गिनती में होने चाहिए। उदाहरण के लिए, दस प्रकार के फूल, सुगंध, दीपक, फल दस अलग-अलग तरह की चीजों का दान करें। गंगा में स्नान करते समय दस डुबकी लगानी चाहिए।