शराब कारोबारी संजीव गुप्ता सहित तीन के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज
टांडा(रामपुर)। रामपुर के एसपी रहे शगुन गौतम समेत 24 पुलिस कर्मियों के खिलाफ डीआईजी की जांच के बाद कार्रवाई की तलवार लटकने से चर्चाओं में आए शराब कारोबारी संजीव गुप्ता उनकी पत्नी और एक अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। ये रिपोर्ट बाजपुर निवासी कारोबारी ने खनन के पट्टे की भूमि से साधारण बालू उठाने के बाद 78 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए दर्ज कराई है।
पुलिस के मुताबिक बाजपुर के मोहल्ला सुभाष नगर निवासी अरुण कुमार गोयल ने सीओ स्वार श्रीकांत प्रजापति को शिकायत पत्र देकर आरोप लगाया था कि टांडा क्षेत्र के अकबराबाद गांव में जिलाधिकारी के आदेश पर गाटा संख्या 92, 93 व 94 रकबा 2.0240 हेक्टेयर चार दिसंबर 2020 को स्वीकृत किया गया था। पट्टे से प्राप्त होने वाली बालू का विक्रय मेसर्स सलिटेयर इंफ्राटेक द्वारा प्रोप्राइटर रोली गुप्ता पत्नी संजीव गुप्ता को 360 रुपये प्रति घनमीटर के हिसाब से किया था। इसमें संजीव गुप्ता की फर्म द्वारा 20 फरवरी 2021 से 31 मई 2021 तक कुल 21,842 घनमीटर बालू 360 रुपये प्रति घन मीटर के हिसाब से विक्रय की गई। जिसकी कुल राशि 82,56,276 रुपए हुई। जिसमे से फर्म ने चार लाख रुपये आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान कर दिए और बाकी के बचे 78,56,256 रुपये की बकाया कुछ समय बाद देने को कहा लेकिन काफी समय निकल जाने के बाद जब उसने बकाया धनराशि मांगी तो उन्होंने देने से मना कर दिया। टांडा पुलिस ने इस मामले में अरुण कुमार गोयल की तहरीर के आधार पर रोली गुप्ता, संजीव गुप्ता और राजेश कुमार गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। वहीं, इस मामले में संजीव गुप्ता का कहना है कि उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप गलत है। उन्होंने चेक द्वारा पूरी धनराशि का भुगतान कर दिया गया है।
संजीव की शिकायत पर दोषी पाए जा चुके
हैं एसपी शगुन गौतम सहित 24 पुलिसकर्मी
रामपुर। छह अप्रैल 2021 को पुलिस ने दावा किया था कि मिलक थाना क्षेत्र में शराब तस्करों से मुठभेड़ हुई थी। इस दौरान पुलिस ने एक शराब से भरा कैंटर भी पकड़ा दर्शाया था। जिसमें 32 लाख रुपये की शराब भरी हुई बताई गई थी। पुलिस ने इस दौरान राहुल कुमार, संजीव गुप्ता, राजीव कुमार, मनोहर लाल, अमन भाटिया को गिरफ्तार किया था। जेल से रिहा होने के बाद संजीव गुप्ता ने मामले की सीएम से शिकायत की थी। शिकायत के दौरान साक्ष्य पेश करते हुए आरोप लगाया था कि तत्कालीन एसपी शगुन गौतम के इशारे पर उन्हें झूठा फंसाया गया था। पुलिस ने उनसे दस लाख रुपये लिए और फर्जी मुठभेड़ दिखाकर बंद कर दिया। शासन के आदेश के बाद डीआईजी ने मामले की जांच की थी। जांच के दौरान पुलिस पर लगाए आरोप सही पाए गए थे। जिसमें डीआईजी ने माना था कि पुलिस ने सही कार्रवाई नहीं की थी। इसमें तत्कालीन एसपी शगुन गौतम समेत 24 पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी।