शनिवार को बिलारी चीनी मिल के खिलाफ एक और मुकदमा दर्ज करा दिया गया। मिल के अध्याशी समेत पांच को नामजद किया गया है। मुकदमे में कहा गया है कि मिल ने चीनी तो बेच दी मगर किसानों का पेमेंट नहीं किया है। इसे टेगिंग आदेश का उल्लंघन माना गया है। मिलों द्वारा चीनी की बिक्री तो लगातार की जा रही है मगर किसानों का पेमेंट नहीं कर रहे हैं। ऐसी मिलों के खिलाफ कार्रवाई होने लगी है।
बिलारी चीनी मिल का प्रशासन भी टेगिंग आदेश के उल्लंघन में फंस गया है। गन्ना विकास समिति के विशेष सचिव घनश्याम ने डीएम से अनुमति मिलने के बाद कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी और शीरा बिक्री से जो पैसा प्राप्त हुआ था उससे गन्ने का पेमेंट नहीं किया गया। गन्ना खरीद के चौदह दिनों पेमेंट भी नहीं किया जा रहा है। गन्ना समिति ने खरीद की जो व्यवस्था बनाई थी उसका भी पूरा पालन शुगर मिल द्वारा नहीं किया गया। समिति सचिव के मुताबिक गन्ना प्रबंधन ने गन्ना खरीद के भुगतान और उपलब्ध चीनी के स्टॉक की भ्रामक सूचना दी।
इस पर बिलारी शुगर मिल के अध्याशी राणा वीर प्रताप सिंह, निदेशक कर्ण प्रताप सिंह, महाप्रबंधक गन्ना वेदपाल सिंह चौहान, उप महाप्रबंधक लेखा सचिन गुप्ता और सेल्स आफिसर विवेक अहलावत के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। समिति सचिव ने यह भी बताया कि शुगर मिल के खिलाफ एक बार नियम विरुद्ध गन्ना खरीद करने तथा दूसरी बार नियमानुसार गन्ने का भुगतान न करने पर भी कोतवाली में मुकदमें दर्ज कराए गए है जिनकी जांच की जा रही है।