यह विवाद तब शुरू हुआ जब रामपुर निवासी आबिद हुसैन द्वारा कृषि प्रदर्शनी में झूलों, सर्कस आदि के संचालन के लिए मांगी गई अनुमति के क्रम में जिला मनोरंजन कर अधिकारी ने नगर निगम द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाओं की जांच कर अनापत्ति प्रमाण पत्र देने के संबंध में एक पत्र नगर स्वास्थ्य अधिकारी को भेजा। जिसमें प्रदर्शनी का संचालन 27 मई से 30 जून तक करने के लिए अनापत्ति मांगी गई थी। प्रदर्शनी का शुभारंभ 27 मई शुरू कर दिया गया जबकि नगर स्वास्थ्य अधिकारी को यह पत्र 30 मई को मिला। नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने प्रदर्शनी शुरू होने के बाद अनापत्ति मांगने को औचित्यहीन बताया है।
जांच कर प्रदर्शनी को बताया मानक के विपरीत
नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. सुनील दोहरे ने प्रदर्शनी की जांच कर उसे मानक के विपरीत बताया है। उन्होंने बताया कि लकड़ी, बांस, कपड़े की बनी अस्थाई दुकानें मजबूत नहीं हैं। अत्यंत ज्वलनशील हैं। मार्ग के दोनों ओर नालियों के ऊपर बनाई गई हैं। जिससे बरसात से पूर्व नालों की तलीझाड़ सफाई नहीं हो सकेगी। उन्होंने कहा कि मेले में लगे खाद्य पदार्थ ढके नहीं हैं। धूल, मिट्टी, कीड़े-मकौड़ों के खाद्य सामग्री पर बैठने से संक्रामक रोगों के फैलने तथा वहां उपयोग किए जा रहे घरेलू गैस सिलिंडरों, टीन की चादरों के सहारे लगे बिजली के तारों से दुर्घटना की आंशका बनी हुई है। मेले में देर रात तेज आवाज में लाउडस्पीकरों के बजने को भी मानक के विपरीत बताया है। यही नहीं लगी प्रदर्शनी को संयुक्त प्रांत मेला अधिनियम का उल्लंघन भी बताया है।