जिला प्रशासन ने स्टॉप का बकाया 25 करोड़ 34 लाख रुपये जमा न करने पर टोल प्लाजा की जमीन कुर्क कर दी थी। आपातकालीन सेवा को छोड़कर कैश रूम सहित चार कमरों को सील कर दिया था। इस मामले में एनएचएआई हाईकोर्ट गई। कोर्ट ने मुकदमे को पंजीकृत करने के साथ 15 करोड़ रुपये तत्काल राजस्व विभाग को जमा करने के निर्देश दिए। इसके बाद ही एनएचएआई का बैंक अकाउंट खोला जाएगा। डीएम मानवेंद्र सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश को लागू किया जाएगा। इधर एनएचएआई के पीडी प्रवीण जिंदल का कहना है कि शीघ्र ही वह पैसा जमा करने की व्यवस्था कर रहे हैं। पैसा शीघ्र जमा किया जाएगा। इस मामले में उन्होंने अपने मुख्यालय से बातचीत की है। एसडीएम ने बताया कि साढ़े 18 करोड़ के अनुबंध पर 2010 में एनएचएआई के ठेकेदार ने स्टॉप शुल्क जमा नहीं किया था। इस मामले में 25 करोड़ 34 लाख की आरसी काटी गई है। इस बारे में तहसीलदार रामवीर सिंह ने बताया कि टोल प्लाजा की तरफ से पैसे देने का मैसेज आया था लेकिन अभी तक चेक नहीं मिला है।
डीएम के आदेश पर हुई सख्ती
डीएम मानवेंद्र सिंह के निर्देश पर तहसीलदार सदर रामवीर सिंह ने टीम के साथ 31 जनवरी की शाम मूंढापांडे नियामतपुर इकटोरिया स्थित टोल प्लाजा पर पहुंचकर जमीन की कुर्की की थी। कर्मचारियों ने टोल ऑफिस के बाहर लाल झंडी लगाकर टोल प्लाजा की जमीन कुर्की की कार्रवाई की। इसके बाद टीम ने टोल प्लाजा के ऑफिस के कैश रूम, प्वाइंट ऑफ सेलर्स सहित चार कमरों को सील कर दिया था। उन्होंने आपातकालीन कंट्रोल रूम, चिकित्सा, एंबुलेंस आदि को सील नहीं किया था। इसके बाद टोल प्लाजा के अधिकारी सक्रिय हुए।