पुलिस जफर में उलझी रही और पचास हजार का इनामी दिलशाद आसानी से कोर्ट पहुंच गया और सरेंडर कर दिया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। ठाकुरद्वारा में 13 सितंबर को एसडीएम परमानंद और खनन अधिकारी अशोक कुमार पर खनन माफिया और उनके गुर्गों ने हमला कर खनन से लदे डंपर छुड़ा लिए थे। इस मामले में पांच नामजद और 150 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
पुलिस अब तक मुख्य आरोपी जफर समेत 18 आरोपी जेल भेजे जा चुकी है। इधर, पुलिस जफर के मामले में ही उलझकर दूसरे मुख्य आरोपी दिलशाद को जल्द गिरफ्तार करने का दावा करती रह गई, उधर, फरार पचास हजार के इनामी दिलशाद मंगलवार को बुर्का पहुंचकर कोर्ट पहुंच गया और अधिवक्ता की मदद से आत्मसमर्पण कर दिया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
इससे पहले पुलिस ने ठाकुरद्वारा के रतूपुरा उसके घर के अलावा बिजनौर में भी दबिश दी थी लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। मुठभेड़ में जफर के घायल होने के बाद से दिलशाद सरेंडर करने की फिराक में लगाया था। इसके लिए उसने कुछ नेताओं के जरिये पहले पुलिस के सामने सरेंडर करने की योजना बनाई। यहां सफल नहीं हो पाया। इसके बाद उसने अपने अधिवक्ता की मदद से कोर्ट में सरेंडर एप्लीकेशन लगा दी। बताया जा रहा है कि दिलशाद बुर्का पहनकर कार में सवार हुआ। कार कचहरी के पास एसबीआई के पास रुकी। पिछले गेट से वह कचहरी में प्रवेश हुआ और सीधे कोर्ट में दाखिल हो गया।
पहले ले आया था गिरफ्तारी पर स्टे, धाराएं बढ़ने से बढ़ी थीं मुश्किलें
खनन अधिकारी अशोक कुमार ने ठाकुरद्वारा थाने में आईपीसी की धारा 147/341/352/332/504/353 भादवि व धारा-21(4), 03 लोक संपत्ति के नुकसान निवारण अधिनियम 1984 में केस दर्ज कराया था। विवेचक ने एसडीएम परमानंद के बयान दर्ज करने के बाद केस में डकैती की धारा 395, वसूली 384 की धाराएं भी बढ़ा दी थी। इसके अलावा आरोपी दिलशाद के खिलाफ गैंगस्टर का केस दर्ज हुआ था। इसके बाद उसने फिर से फरारी शुरू कर दी थी।
अब रिमांड पर लेगी पुलिस
ठाकुरद्वारा के रतपुरा निवासी दिलशाद ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। अब पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेगी।