मुरादाबाद। चर्तुमास के समापन के साथ ही चार नवंबर को देव जागेंगे। इसी के साथ ही शुक्रवार को चार माह बाद शहनाई की गूंज सुनाई देगी। हालांकि इसके बाद शुक्र अस्त होने की वजह से 20 नवंबर तक मांगलिक कार्यों पर रोक रहेगी।
देवोत्थान एकादशी को शादियों के लिए सबसे बड़ा मुहूर्त माना जाता है। इसकी वजह से इस दिन चारों तरफ रौनक रहती है। शादियों के लिए बैंक्वेट हॉल संचालक और अन्य कारोबारों से जुड़े लोगों में भी जबरदस्त उत्साह है। रामपुर रोड स्थित एक होटल के प्रबंधक रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि शुक्रवार को होटल में एक दिन में दो शादियां और एक रिंग सेरेमनी का आयोजन होगा। टैंट आदि का काम बुधवार से ही शुरू हो गया था। इस बार की शादियों में लोग विदेशी और वास्तविक फूलों की मांग कर रहे हैं। टैंट का रंग भी उनकी शादी की थीम के अनुसार करवाया गया है। शुक्रवार के बाद नवंबर माह में शादियों के पांच मुहूर्त हैं। देवोत्थान एकादशी पर तुलसी विवाह होगा। इसके लिए मंदिरों में भी खास तैयारियां की गई हैं। सिविल लाइंस स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अंबरीश पांडेय ने बताया कि इस दिन भक्त परिवार की सुख और समृद्धि के लिए भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। इस दिन श्रद्धालु व्रत भी रखते हैं। देवोत्थान एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और तुलसी की शालिग्राम से शादी की जाती है। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालु पूजा-पाठ के लिए पहुंचने लगेंगे।