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साइबर अपराधियों ने सीए और असिस्टेंट प्रोफेसर के खातों से उड़ाई रकम

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साइबर अपराधियों ने सीए और असिस्टेंट प्रोफेसर के खातों में लगाई सेंध
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मुरादाबाद। साइबर अपराधियों ने सीए और असिस्टेंट प्रोफेसर के खातों से रकम उड़ा ली। सीए के एक खाते से 89 हजार और दूसरे खाते से 19 हजार रुपये जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर के खाते से तीस हजार रुपये साइबर अपराधियों ने दूसरे खातों में ट्रांसफर कर लिए। इनके अलावा जिला अबकारी अधिकारी से भी साइबर ठगी की कोशिश की गई।
मझोला के मानसरोवर कालोनी निवासी मयूरी चौधरी सीए हैं। उन्होंने मझोला थाने में केस दर्ज कराया है। उनका एक खाता एचडीएफसी बैंक की सिविल लाइंस मेन ब्रांच में है। जबकि दूसरा खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की बर्तन बाजार शाखा में है। मयूरी का कहना है कि हैकर ने तीस जुलाई को उनके एक खाते से 89 हजार और दूसरे खाते से 1900 रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लिए हैं। मयूरी का कहना है कि मोबाइल पर मैसेज आने के बाद वह तुरंत एचडीएफसी बैंक गईं। वहां एक घंटे तक कर्मचारी उन्हें इधर से उधर घुमाते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं की। इसके बाद महिला कर्मचारी ने उनसे कहा कि सोमवार में आए। अब आपका कोई कार्य नहीं हो पाएगा। बैंक से कोई मदद नहीं मिलने पर पीड़ित ने थाने में तहरीर दी।
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साइबर ठगी की दूसरी घटना रुद्रपुर निवासी मोनिका के साथ हुई है। वह महानगर के एक कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं और रामगंगा विहार में रहती है। मोनिका ने साइबर सेल में तहरीर दी है। जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने क्रेडिट कार्ड बैंक से जारी कराया था। कोरियर पहुंचने के दस मिनट बाद ही उनके मोबाइल पर एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक के क्रेडिट कार्ड डिपार्टमेंट से बताया। उसने कार्ड एक्टिवेट करने के नाम पर मोनिका से उनके खाते और कार्ड की जानकारी ले ली। इसके बाद मोनिका के खाते से तीस हजार रुपये उड़ गए। उन्होंने उस नंबर पर कॉल की तो वह नंबर बंद हो चुका था। जिला आबकारी अधिकारी महेंद्र पाल ने बताया कि उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया। जिसमें बताया गया कि बिजली का बिल जमा नहीं होने पर कनेक्शन कट जाएगा। जिला आबकारी अधिकारी ने उस नंबर पर कॉल की। उसने बताया कि उनका बिल तो पहले ही जमा हो चुका है। तब ठग ने बिल ठीक करने का झांसा देकर दस रुपये ट्रांसफर करने को कहा। साइबर ठग की बातें सुनकर जिला आबकारी अधिकारी अलर्ट हो गए और उन्होंने कोई पैसा ट्रांसफर नहीं किया। वरना वो भी साइबर ठगी के शिकार हो सकते थे।
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