शासन द्वारा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के शैक्षिक सत्र 2018 को अप्रैल माह से शुरू करने की योजना है। इसके तहत गृह परीक्षा 15 जनवरी से आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। सत्र का समय कम हो जाने से विद्यार्थियों को अधूरे पाठ्यक्रम से वार्षिक परीक्षा देनी होंगी। शिक्षकों का कहना है कि उनका परिणाम प्रभावित न हो, इसलिए प्रतिदिन गृह कार्य में महत्वपूर्ण प्रश्न याद करने के लिए दिए जा रहे हैं।
यूपी बोर्ड की परीक्षा छह फरवरी से दस मार्च तक प्रस्तावित हैं और कापियों का मूल्यांकन 15 मार्च से कराए जाने की योजना है। गृह परीक्षाओं का परिणाम भी 31 मार्च को घोषित करना है। इसलिए परीक्षाओं को दो महीने पहले जनवरी में कराई जा रही हैं।
एक मार्च तक था शैक्षिक कैलेंडर
शिक्षकों ने बताया कि जुलाई में जब पढ़ाई शुरू हुई थी तो शासन द्वारा मार्च में गृह परीक्षाओं को आयोजित कराने का शैक्षिक कैलेंडर जारी किया था। इसके अनुरूप अर्धवार्षिक परीक्षाएं 15 नवंबर तक संपन्न हुई हैं। पहले से भी जनवरी में परीक्षा कराए जाने का कोई निर्देश नहीं था। इसके कारण पाठ्यक्रम को भी पुराने तरीके से पढ़ाया जा रहा था।
समय बदलाव से पीरियड का समय कम
तापमान में गिरावट के बाद विद्यार्थियों को ठंड से राहत देते हुए जिलाधिकारी ने स्कूलों का समय सुबह दस से तीन बजे तक का कर दिया था। पढ़ाई का समय एक घंटा कम होने से प्रत्येक पीरियड से दस-दस मिनट की कटौती की गई। अब 30 मिनट का एक पीरियड है। समय कम होने से शिक्षक अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन नहीं कर पा रहे हैं।
गृहकार्य में याद करा रहे प्रश्न
शिक्षकों का कहना है कि शासन के आदेश के अनुरूप तैयारियां की जा रही हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि परीक्षा होने तक मुश्किल से 90 फीसदी पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जा सकेगा। ऐसे में परिणाम प्रभावित होने की पूरी संभावना है, लेकिन विद्यार्थियों का ज्यादा नुकसान न हो, इसलिए उन्हें घर पर महत्वपूर्ण प्रश्नों को याद करने के लिए दिया जा रहा है। दूसरे दिन क्लास में उन प्रश्नों को सुना जाता है और जल्दी-जल्दी टेस्ट लेने की भी योजना बनाई है।
वर्जन...
सोमवार को शिक्षकों के साथ बैठक कर रणनीति बनाई गई है। सर्दी के मौसम को देखते हुए भले ही परिषदीय स्कूलों का अवकाश घोषित हो जाए, लेकिन छात्रहित में माध्यमिक स्कूलों का समय दस से चार कर देना चाहिए। इससे तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा।
डॉ. कुलदीप बरनवाल, प्रधानाचार्य, जीजी हिंदू इंटर कालेज।
शासन के आदेश के अनुरूप अब पढ़ाई में परिवर्तन किया गया है। प्रयास किया जा रहा है कि यदि कुछ पाठ्यक्रम शेष रहता है तो इतनी परेशानी नहीं है, लेकिन जो पढ़ाया जा रहा है, वह छात्रों को याद होना चाहिए। बच्चों के भविष्य को देखते हुए हमें बेहतर करके दिखा होगा।
उदयराज सिंह, प्रधानाचार्य, एसडीएम इंटर कालेज।